Flood Situation Near Gandak River: नेपाल में भारी बारिश से बिहार में बिगड़ सकते हैं हालात, गंडक नदी के उफान से कई इलाकों में बाढ़ का खतरा
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में जारी मूसलाधार बारिश के चलते उत्तर बिहार में गंडक नदी उफान पर आ गई है. वाल्मीकिनगर बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिम चंपारण और गोपालगंज में तटबंधों को नुकसान पहुंचा है, जिससे दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है.
Flood Situation Near Gandak River: नेपाल के तराई और कैचमेंट क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब उत्तर बिहार में गंभीर बाढ़ संकट के रूप में सामने आ रहा है. गंडक नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े जा रहे भारी पानी के कारण नदी का प्रवाह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. पानी के प्रचंड दबाव से पश्चिम चंपारण और गोपालगंज जिलों में तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे आसपास की बड़ी ग्रामीण आबादी जलभराव की चपेट में आ गई है.
तटबंध टूटने से निचले इलाकों में घुसा पानी
नेपाल से आ रहे पानी के तीव्र बहाव के कारण पश्चिम चंपारण जिले के बगहा-1 और बैरिया क्षेत्रों में चंपारण तटबंध के हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. बगहा के खैरटवा और मोतिहारी के अरेराज क्षेत्र में बांध क्षरण के कारण पानी निचले रिहाइशी इलाकों और कृषि योग्य खेतों में तेजी से फैल रहा है. यह भी पढ़े: Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर, 13 जिलों की करीब 34 लाख आबादी प्रभावित, राहत और बचाव कार्य जारी
बगहा में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर 91.25 मीटर के स्तर तक पहुंच गया. नदी के बढ़े जलस्तर की वजह से सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित कई गांवों के साथ-साथ सशस्त्र सीमा बल (SSB) के शिविरों में भी पानी प्रवेश कर गया है.
प्रशासन और जल संसाधन विभाग हाई अलर्ट पर
बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए बिहार के जल संसाधन विभाग ने वरिष्ठ अभियंताओं और आपदा प्रबंधन टीमों को बगहा, बेटिया, मोतिहारी, गोपालगंज और सारण जिलों में अलर्ट पर रखा है. विभाग द्वारा तटबंधों के संवेदनशील स्थलों पर बालू की बोरियां (Sandbags) डालकर क्षरण और रिसाव को रोकने की आपातकालीन मरम्मत की जा रही है.
प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की नौकाएं और बचाव दल तैनात किए गए हैं. इसके अलावा, विस्थापित लोगों के लिए प्राथमिक राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई (Community Kitchen) का संचालन शुरू कर दिया गया है.
अन्य नदियों में भी उफान, स्थिति पर नजर
गंडक के साथ-साथ कोसी और बागमती नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि देखी जा रही है, जिससे दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल और सहरसा के निचले इलाकों पर दबाव बढ़ गया है. मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग द्वारा नेपाल और उत्तर बिहार में बारिश के पूर्वानुमान पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. स्थानीय प्रशासन ने नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थलों की ओर शरण लेने की सलाह दी है