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फीफा वर्ल्ड कप में हार के बाद इस्तीफा दे सकते हैं जर्मन कोच यूलियान नागेल्समान
अमेरिका ने किया “आतंकी हमलों” के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बती एक्टिविस्ट ने आत्मदाह कर जान दी
नाटो पर फिर भड़के डॉनल्ड ट्रंप, संबंधों को बताया एकतरफा
नाटो पर फिर भड़के डॉनल्ड ट्रंप, संबंधों को बताया एकतरफा
तुर्की की राजधानी अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक एक हफ्ते पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस सैन्य गठबंधन पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है. डॉनल्ड ट्रंप ने नाटो के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के मौजूदा संबंधों को एकतरफा बताते हुए कहा कि इसे इसी तरह जारी रखना मजाक के सिवा कुछ नहीं है.
डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "वे हमारे लिए कभी खड़े नहीं रहे!!!" उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन का नाटो के साथ रिश्ता पारस्परिक नहीं है. ट्रंप ईरान में चल रहे युद्ध को लेकर यूरोपीय सहयोगियों के रुख से लगातार नाराज हैं, क्योंकि युद्ध के दौरान कई यूरोपीय देशों ने अमेरिकी सेनाओं के लिए अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगा दीं. वे चाहते हैं कि यूरोप अपनी रक्षा की कमान खुद संभाले, और वॉशिंगटन ने पहले ही अपनी जिम्मेदारियों को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने एक चार्ट भी साझा किया जिसमें दिखाया गया कि अमेरिका अन्य सदस्य देशों की तुलना में नाटो पर काफी ज्यादा खर्च कर रहा है.
ट्रंप के लगातार दबाव के बाद, पिछले साल हुए एक सम्मेलन में नाटो नेता साल 2035 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के पांच प्रतिशत तक बढ़ाने पर सहमत हुए थे. अब 32 सदस्य देशों का आगामी नाटो शिखर सम्मेलन 7-8 जुलाई को अंकारा में होने जा रहा है. साल 1949 में स्थापित यह गठबंधन दशकों तक यूरोप में स्थिरता बनाए रखने और अमेरिकी वैश्विक शक्ति को मजबूत करने का मुख्य जरिया रहा है.
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बती एक्टिविस्ट ने आत्मदाह कर जान दी
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर एक 52 वर्षीय व्यक्ति ने खुद को आग लगाकर जान दे दी. मृतक की पहचान लोबगा रैंगजेन के रूप में हुई है. तिब्बती भाषा में रैंगजेन का अर्थ आजादी है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, रैंगजेन आत्मदाह से पहले तिब्बत की आजादी के समर्थन में अपील कर रहे थे और अपने साथ तिब्बत का झंडा भी लाए थे.
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न्यूयॉर्क पुलिस ने बताया कि उन्हें स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:30 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद गंभीर रूप से झुलसे रैंगजेन को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और उन्होंने अभी तक आधिकारिक तौर पर मृतक की पहचान या इस आत्मदाह के पीछे के सटीक मकसद की पुष्टि नहीं की है. रैंगजेन पेशे से टैक्सी ड्राइवर थे.
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'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' की अध्यक्ष तेंचो ग्यात्सो ने रैंगजेन को तिब्बत में मानवाधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने वाला निर्भीक कार्यकर्ता बताया. उनके साथियों के मुताबिक, रैंगजेन तिब्बतियों के प्रति चीन की दमनकारी नीतियों और हाल ही में लागू हुए नए 'जातीय एकता कानून' से बेहद गुस्से में थे. उनके एक साथी ने बताया कि चीन सरकार द्वारा तिब्बत के लोगों पर लगाई जा रही लगातार पाबंदियों के कारण वे लंबे समय से आक्रोश में थे.
यूरोप: बैन के बाद भी ऑनलाइन बिक रहे हैं प्रतिबंधित प्लास्टिक प्रोडक्ट
यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा सिंगल-यूज प्लास्टिक उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए जाने के पांच साल बाद भी ये उत्पाद ऑनलाइन बिक रहे हैं. पर्यावरण संगठन 'एनवायरमेंटल एक्शन जर्मनी' (डीयूएच) ने शुक्रवार को इस पर चिंता जताते हुए नियमों को और सख्त करने की मांग की है.
यूरोपीय संघ ने प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए 3 जुलाई, 2021 से सिंगल-यूज प्लास्टिक से बने चम्मच-कांटे, स्ट्रॉ, स्टिरर और प्लेट जैसी डिस्पोजेबल चीजों की बिक्री पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद कई कंपनियों ने लकड़ी, बांस या कागज के विकल्प अपना लिए थे.
डीयूएच की कैंपेनर वियोला वोहलगैमुथ ने इसे एक राजनीतिक विफलता करार देते हुए कहा कि कई वेबसाइटों पर अब भी इन प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों के विकल्प मिल रहे हैं. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से ऑनलाइन रिटेलर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और जुर्माना लगाने की मांग की है.
दूसरी ओर, जर्मनी के पर्यावरण मंत्रालय ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि दुकानदारों और रिटेलर्स को प्रतिबंध लागू होने से पहले के पुराने स्टॉक को बेचने की अनुमति दी गई है और इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं है. हालांकि, मंत्रालय ने यह भी माना कि इस छूट की वजह से बनी कमियों के कारण प्रतिबंध को पूरी तरह लागू करना और उसकी निगरानी करना काफी मुश्किल हो रहा है.
मर्कोसुर समझौते को रफ्तार देने ब्राजील पहुंचे जर्मन विदेश मंत्री
जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफुल अपने चार दिवसीय दक्षिण अमेरिकी दौरे के अंतिम चरण में शुक्रवार को ब्रासीलिया पहुंचे. वहां वे अपने ब्राजीलियाई समकक्ष मौरो विएरा से मुलाकात करेंगे, जिसमें यूरोपीय संघ और मर्कोसुर मुक्त व्यापार समझौता एजेंडे में सबसे ऊपर रहेगा. इस साल मई की शुरुआत में अस्थायी रूप से लागू हो चुके इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं और टैरिफ को धीरे धीरे कम करके वस्तुओं और सेवाओं के आदान प्रदान को बढ़ावा देना है.
जर्मनी इस समझौते को अपने ऑटोमोटिव उद्योग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र और फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए बड़े अवसर के रूप में देख रहा है. ब्राजील दक्षिण अमेरिका में जर्मनी का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है, लेकिन साल 2009 से ही चीन इस क्षेत्र में हावी है. चीन न केवल ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, बल्कि दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के निवेश और मजबूत राजनीतिक संबंध भी हैं.
इस दौरे के पीछे जर्मनी का एक बड़ा भू-राजनीतिक मकसद चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना भी है. दरअसल, ब्राजील के पास दुर्लभ धातुओं और महत्वपूर्ण खनिजों का विशाल भंडार है, जो भविष्य की तकनीकों जैसे कि रिन्यूएबल एनर्जी और ईवी के लिए बेहद जरूरी हैं.
पाकिस्तान में बस खाई में गिरने से 40 लोगों की हुई मौत
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शुक्रवार सुबह यात्रियों से भरी एक बस खाई में गिर गई. अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में 40 लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए. पुलिस अधिकारी अली रजा ने न्यूज एजेंसी डीपीए को बताया कि यह बस क्वेटा से पेशावर जा रही थी और करीब आधे रास्ते में दाना सर के पहाड़ी इलाके में हादसे का शिकार हो गई.
न्यूज एजेंपी एपी ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे और यह तेज रफ्तार में जा रही थी. बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि हादसे का शिकार हुई बस में एक दूसरी बस के यात्री भी सवार थे, जो रास्ते में खराब हो गई थी. उन्होंने कहा कि मृतकों की पहचान करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
बचाव विभाग के प्रवक्ता फजल दिन ने डीपीए को बताया कि खाई में गिरने से बस की हालत पूरी तरह से खराब हो गई थी, इसलिए बचावकर्मियों को घायलों और मृतकों के शवों को निकालने के लिए कटर और दूसरी मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ा. उन्होंने कहा कि कुछ घायलों की हालत अभी बेहद गंभीर है, ऐसे में मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.
अमेरिका ने किया “आतंकी हमलों” के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वह “आतंकवादी हमलों के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन” करता है. अमेरिका ने अपने बयान में कहा, "पाकिस्तानी जनता ने आतंकवादियों के हाथों भारी पीड़ा झेली है." यह बयान तब आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की लड़ाई रुक-रुककर जारी है.
पहले एक-दूसरे के सहयोगी रह चुके पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने इस साल फरवरी में अपनी सबसे भीषण लड़ाई लड़ी थी. पाकिस्तान अफगानिस्तान पर ऐसे उग्रवादियों को शरण देने का आरोप लगाता है, जो पाकिस्तान में हिंसक हमलों को अंजाम देते हैं. वहीं, अफगानिस्तान लगातार इन आरोपों से इनकार करता है.
अमेरिका अफगान तालिबान को एक आतंकवादी समूह मानता है. वहीं, राष्ट्रपति के तौर पर डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में काफी सुधार आया है. ईरान युद्ध के खात्मे के लिए हो रही वार्ता में भी पाकिस्तान एक अहम भूमिका निभा रहा है. ऐसे में अब अमेरिका ने भी पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है.
फीफा वर्ल्ड कप: अल्जीरिया को हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचा स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड ने अल्जीरिया को 2-0 से हराकर वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 16 (प्री-क्वार्टर फाइनल) में अपनी जगह पक्की कर ली है. अब अंतिम-16 के मुकाबले में स्विट्जरलैंड का सामना शुक्रवार को कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा.
मैच के पहले हाफ में स्विट्जरलैंड के लिए ब्रील एम्बोलो ने पहला गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी. इसके बाद दूसरे हाफ के पहले ही मिनट में डैन एनडॉय ने दूसरा गोल दाग दिया.
इस हार के साथ ही अल्जीरिया भी आइवरी कोस्ट, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका की तरह राउंड ऑफ 32 के दौर से बाहर होने वाली अफ्रीकी टीमों की सूची में शामिल हो गया है. इस वर्ल्ड कप में अब तक केवल मोरक्को ही एकमात्र अफ्रीकी टीम है जो अगले दौर में आगे बढ़ सकी है.
फीफा वर्ल्ड कप में हार के बाद इस्तीफा दे सकते हैं जर्मन कोच यूलियान नागेल्समान
फुटबॉल वर्ल्ड कप में जर्मन टीम के खराब प्रदर्शन और जल्दी बाहर हो जाने के बाद मुख्य कोच यूलियान नागेल्समान अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. जर्मन ब्रॉडकास्टर स्काई और बिल्ड अखबार के मुताबिक, नागेल्समान ने यह फैसला गुरुवार को फ्रैंकफर्ट में जर्मन फुटबॉल फेडरेशन (डीएफबी) के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई एक अहम बैठक के बाद लिया है, जिसमें फुटबॉल बोर्ड ने उन्हें पद छोड़ने का सुझाव दिया था.
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जर्मनी को सोमवार को राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में पराग्वे के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद टीम लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप से शुरुआती दौर में बाहर हो गई. इससे पहले 2018 और 2022 के वर्ल्ड कप में भी जर्मनी ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाया था. हालांकि, पराग्वे से मिली हार के बाद नागेल्समान ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन फेडरेशन के दबाव के बाद अब वे पद छोड़ने को तैयार हो गए हैं.
फुटबॉल फैंस और विशेषज्ञ अब लिवरपूल के पूर्व कोच युर्गेन क्लोप को नागेल्समान के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देख रहे हैं. जर्मनी का अगला मुकाबला 24 सितंबर को नेशंस लीग में नीदरलैंड्स के खिलाफ होना है, ऐसे में बोर्ड जल्द ही नए कोच के नाम पर मुहर लगा सकता है.
चार चीनी कंपनियों को मिली भारतीय परियोजनाओं के लिए बोली लगाने की अनुमति
भारत सरकार ने चार चीनी कंपनियों को अहम ऊर्जा परियोजनाओं के सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने की अनुमति दे दी है. ये चीनी कंपनियां ऊर्जा उपकरण बनाती हैं और भारत में इनकी फैक्ट्रियां भी हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने वित्त मंत्रालय के 24 जून के एक आदेश को देखने के बाद यह जानकारी दी है.
आदेश के मुताबिक, टीबीईए एनर्जी, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया को यह अनुमति मिली है. इसमें कहा गया है कि भारत के ऊर्जा मंत्रालय ने जनवरी में ऐसी चीनी कंपनियों को छूट देने की मांग की थी जो अहम ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल हैं और उनकी यहां फैक्ट्रियां भी हैं.
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साल 2020 में भारत और चीन के बीच हुई झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध काफी बिगड़ गए थे. तब भारत ने नियम लागू किया था कि सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने से पहले चीनी कंपनियों को राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी. अब बीते एक साल से दोनों देशों के संबंधों में सुधार आ रहा है, ऐसे में भारत की ओर से कई चीनी कंपनियों को छूट दी जा रही है.
छूट दिए जाने की एक वजह यह भी है कि भारत तेजी से अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार कर रहा है ताकि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और नवीकरणीय स्रोतों से बन रही बिजली का सही ढंग से वितरण और इस्तेमाल किया जा सके.
पीएम मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे. मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेगे और अगले दिन वापसी करेंगे. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार, 3 जुलाई को यह जानकारी दी. उन्होंने अपने बयान में पीएम मोदी की इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए लिखा कि यह पिछले 40 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला न्यूजीलैंड दौरा होगा.
यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी साल अप्रैल में दोनों देशों ने एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों में अधिक पहुंच मिलेगी और टैरिफों में कटौती होगी. पीएम लक्सन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एफटीए से न्यूजीलैंड में अधिक नौकरियां पैदा होंगी, निर्यात बढ़ेगा और मजबूत आर्थिक विकास होगा.
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की प्रेस रिलीज के मुताबिक, न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने की भी बात कही है, जिससे दोनों देशों के दीर्घकालिक आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे. रिलीज के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुआ व्यापार समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को मजबूत करने पर विशेष जोर देता है. साथ ही इसमें भारत ने अपने कृषि और डेयरी उद्योग को भी सुरक्षित रखा है.













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