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- उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत
- मादुरो की "जबरन गिरफ्तारी" को चीन ने बताया "एकतरफा दादागिरी"
- वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप की नए हमले की चेतावनी
- पुतिन के घर ड्रोन हमला होने के रूसी आरोपों को ट्रंप ने किया खारिज
- चीन और पाकिस्तान ने कही एक-दूसरे का अटूट समर्थन करने की बात
- दुनिया की सबसे महंगी मछली: जापान में 29 करोड़ रुपये में बिकी ब्लूफिन टूना
- "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं": ट्रंप की धमकी पर भड़के डेनमार्क और ग्रीनलैंड
- आठ साल में 15वीं बार जेल से बाहर आया राम रहीम
शेख हसीना के कार्यकाल में गायब हुए 1,570 लोग, 287 के मारे जाने की आशंका
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में गायब हुए लोगों की पड़ताल कर रहे एक आयोग ने कम से कम 287 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है. आयोग ने कहा है कि कुछ शवों को नदियों में फेंक दिया गया होगा और कुछ को सामूहिक कब्रों में दफना दिया गया होगा. अगस्त 2024 में हसीना सरकार के गिरने के बाद, इस आयोग का गठन किया गया था.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने अपहरण के करीब 1,570 मामलों की जांच की, जिनमें से 287 पीड़ितों को मृत मान लिया गया. आयोग के एक सदस्य नूर खान ने न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा, "आयोग ने कई जगहों पर ऐसी कब्रों की पहचान की है, जहां शवों को दफनाया गया होगा. आयोग ने सिफारिश की है कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेकर शवों की पहचान करवाई जाए."
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपहरण किए गए लोगों में से कई बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी या बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी से ताल्लुक रखते थे, जो हसीना की विपक्षी पार्टियां थीं. आयोग ने रविवार, 4 जनवरी को सौंपी गई अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा है कि सुरक्षाबल, हसीना और उनके वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के मुताबिक काम कर रहे थे.
2025 में ताइवान पर हर दिन हुए औसतन 26 लाख साइबर हमले
ताइवान के बुनियादी ढांचे जैसे अस्पतालों और बैंकों पर चीन के साइबर हमले साल 2025 में छह फीसदी बढ़ गए. ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो के मुताबिक, ताइवान के बुनियादी ढांचे पर हर दिन औसतन 26 लाख साइबर हमले हुए. ऊर्जा ढांचे, आपातकालीन बचाव प्रणाली और अस्पतालों आदि पर होने वाले साइबर हमलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई.
ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन की साइबर सेना ने राजनीतिक और सैन्य गतिविधियों के साथ तालमेल बिठाते हुए इन साइबर हमलों को अंजाम दिया. उन्होंने उदाहरण दिया कि चीन ने 40 बार ताइवान के पास सैन्य विमान और पोत भेजकर संयुक्त युद्ध तत्परता गश्त कीं और इनमें से 23 मौकों पर साइबर हमले भी बढ़ गए.
रिपोर्ट में कहा गया कि यह ताइवान के अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के चीनी प्रयासों को दिखाता है. ताइवान ने चीन पर हाईब्रिड युद्ध करने का भी आरोप लगाया है. इसके तहत, द्वीप के पास सैन्य अभ्यास किए जाते हैं, दुष्प्रचार अभियान चलाए जाते हैं और साइबर हमले किए जाते हैं. हालांकि, चीन साइबर हमलों के आरोपों से इनकार करता है.
ताइवान एक स्वशासित द्वीप है और खुद को एक संप्रभु राष्ट्र मानता है. वहीं, चीन इसे अपना हिस्सा मानता है और ताकत के बल पर खुद में मिलाने की धमकी भी देता है. दुनिया में सिर्फ 12 देश बचे हैं, जो ताइवान को एक देश के रूप में दर्जा देते हैं. इनमें अधिकतर ग्वाटेमाला, पराग्वे, एस्वातीनी, पलाऊ और मार्शल आइलैंड्स जैसे छोटे-छोटे देश हैं.
न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश हुए वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो
वेनेजुएला के पूर्व नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को सोमवार, 5 जनवरी को कड़े सुरक्षा घेरे में न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट लाया गया. 63 वर्षीय मादुरो पर नशीली दवाओं की तस्करी और आतंकवाद के गंभीर आरोप हैं.
शनिवार, 3 जनवरी को तड़के अमेरिकी एलीट फोर्सेज ने हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों की मदद से वेनेजुएला की राजधानी काराकस में एक सैन्य अभियान के जरिए उन्हें गिरफ्तार किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वेनेजुएला की कमान अमेरिका के पास है और वहां चुनाव कराने की बातें फिलहाल जल्दबाजी होंगी.
इस सैन्य कार्रवाई के दौरान काराकस में भारी खून-खराबा होने की खबरें हैं. वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाड्रिनो लोपेज के अनुसार, अमेरिकी हमले में मादुरो की सुरक्षा टीम के अधिकांश सदस्य, सैन्य कर्मी और कई नागरिक मारे गए हैं. हालांकि, वेनेजुएला की सेना ने अब कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को मान्यता दे दी है और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है.
दूसरी ओर, काराकस की सड़कों पर तनाव बरकरार है. रविवार, 4 जनवरी को मादुरो के लगभग 2,000 समर्थकों ने झंडे और हथियारों के साथ रैली निकालकर इस कार्रवाई का विरोध किया. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि अमेरिका का ध्यान अभी वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को ठीक करने पर है, न कि तत्काल सत्ता हस्तांतरण पर.
बांग्लादेश में आईपीएल 2026 के प्रसारण पर लगा प्रतिबंध
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल-2026) के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है. यानी अब बांग्लादेश में बैठे दर्शक टीवी पर आईपीएल मैच नहीं देख सकेंगे. इससे पहले बांग्लादेश ने कहा था कि उनकी टीम टी-20 विश्वकप के अपने मैच भारत में नहीं खेलेगी. उन्होंने मांग की थी कि उनके मैच श्रीलंका में करवाए जाएं.
यह सब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उस फैसले के बाद हो रहा है, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स को बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने के लिए कहा गया था. केकेआर ने 9.20 करोड़ रुपये की बोली लगाकर रहमान को टीम में शामिल किया था, लेकिन बीसीसीआई के निर्देश के बाद उन्हें टीम से बाहर करना पड़ा.
बीसीसीआई के इस फैसले पर बांग्लादेश में तीखी प्रतिक्रिया हुई. बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईपीएल के प्रसारण को प्रतिबंधित करने के अपने फैसले पर कहा कि आईपीएल से मुस्तफिजुर जैसे "स्टार खिलाड़ी" को बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के बाहर करना "तर्कहीन" था और इससे "लोगों को दुख पहुंचा".
मस्क के एआई टूल ग्रोक पर बच्चों की 'न्यूड' फोटो बनाने के आरोप
इलॉन मस्क के एआई टूल 'ग्रोक' पर बच्चों और महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें न्यूड फोटो में बदलने के गंभीर आरोप लगे हैं. यह विवाद दिसंबर के अंत में ग्रोक द्वारा 'एडिट इमेज' बटन पेश किए जाने के बाद शुरू हुआ, जिसका दुरुपयोग कर कुछ यूजर्स ने बच्चों और महिलाओं की तस्वीरों को आपत्तिजनक तरीके से मॉडिफाई किया. मस्क की कंपनी एक्सएआई ने स्वीकार किया है कि उनके सुरक्षा तंत्र में खामियां रही हैं और वे इसे ठीक करने के लिए तत्काल कदम उठा रहे हैं.
फ्रांस के पेरिस अभियोजक कार्यालय ने एक्स के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी बनाने और प्रसारित करने के आरोप शामिल कर लिए हैं. वहीं, भारत सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी से उन उपायों का विवरण मांगा है, जो बिना सहमति के बनाए गए इस अश्लील कंटेंट को हटाने के लिए किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला 'चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल' (सीएसएएम) से जुड़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत एक गंभीर अपराध है.
शुरुआत में, एक्सएआई ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मीडिया को "झूठा" करार दिया था, लेकिन विवाद बढ़ने पर ग्रोक चैटबॉट ने खुद स्वीकार किया कि सुरक्षा में चूक हुई है. एआई सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के टूल्स का दुरुपयोग सामाजिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. यदि कंपनी इन खामियों को रोकने में विफल रहती है, तो उसे अमेरिका और यूरोप में भारी जुर्माने के साथ-साथ आपराधिक मुकदमों का भी सामना करना पड़ सकता है.
ब्रिजिट माक्रों 'साइबर बुलिंग' मामले में फ्रांस की अदालत ने दस लोगों को सुनाई सजा
पेरिस की एक अदालत ने सोमवार, 5 जनवरी को उन दस लोगों को सजा सुनाई, जिन्होंने फ्रांस की फर्स्ट लेडी ब्रिजिट माक्रों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक कैंपेन चलाया था. इन लोगों पर ब्रिजिट माक्रों के जेंडर को लेकर झूठी सूचनाएं फैलाने और दंपति के बीच उम्र के अंतर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप था.
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आठ दोषियों को चार से आठ महीने की निलंबित जेल की सजा सुनाई, जबकि सुनवाई में अनुपस्थित रहने वाले नौवें व्यक्ति को छह महीने की सीधी जेल की सजा दी गई. इसके अलावा, सभी दोषियों को अपने खर्च पर 'ऑनलाइन हेट स्पीच' के खिलाफ एक विशेष कोर्स करने का आदेश दिया गया है. मामले के तीन मुख्य साजिशकर्ताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है.
ब्रिजिट माक्रों ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि 'ट्रांसजेंडर महिला' बताने वाली इन झूठी अफवाहों ने उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया है. उनके वकील जीन एनोची ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि खातों का निलंबन और अनिवार्य सुधार कोर्स, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं.
भारत: 2025 में 166 बाघों की मौत, पिछले साल से 30 फीसदी अधिक
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2025 में कुल 166 बाघों को खो दिया. यह संख्या उससे पिछले वर्ष (2024) की तुलना में 40 अधिक है, जब 126 बाघों की मौत दर्ज की गई थी. इन मृत बाघों में 31 शावक भी शामिल थे.
राज्यों के आधार पर आंकड़ों को देखें तो 'टाइगर स्टेट' के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 55 बाघों की मौत हुई है. इसके बाद महाराष्ट्र में 38, केरल में 13 और असम में 12 बाघों की मौत दर्ज की गई.
मौतों के मुख्य कारणों में प्राकृतिक कारणों के अलावा आपसी संघर्ष, शिकार और मानव-पशु संघर्ष शामिल हैं. बढ़ते शहरीकरण और जंगलों के सिकुड़ने की वजह से बाघ अक्सर रिहाइशी इलाकों की ओर रुख करते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है.
2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2018 के 2,967 से बढ़कर 2022 में 3,682 हो गई थी, जो लगभग 6 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाती है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौतों का यह सिलसिला इसी तरह बढ़ता रहा, तो भविष्य में बाघों की आबादी को संतुलित बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी.
बर्लिन में भीषण ठंड के बीच 45,000 घरों की बिजली गुल, चरमपंथी समूह ने ली जिम्मेदारी
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में चरमपंथी समूह द्वारा पावर ग्रिड पर किए गए हमले के कारण हजारों नागरिक बिना बिजली और हीटिंग के रहने को मजबूर हैं. शनिवार, 3 जनवरी की सुबह बर्लिन के दक्षिण पश्चिमी जिले में एक पावर स्टेशन की केबलों में जानबूझकर आग लगा दी गई. इस हमले से लगभग 45,000 घरों और 2,200 व्यवसायों की बिजली कट गई.
हीटिंग ठप होने के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई स्कूल और किंडरगार्टन बंद कर दिए गए हैं और केयर होम में रहने वाले बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए सेना और दमकल विभाग को तैनात करना पड़ा है. हालांकि, अस्पतालों को आपातकालीन जनरेटरों के सहारे चालू रखा गया है, लेकिन हजारों परिवार अब भी कड़ाके की ठंड में अंधेरे में रहने को मजबूर हैं.
वामपंथी चरमपंथी संगठन 'वोल्केनो ग्रुप' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. समूह ने ऑनलाइन जारी एक पत्र में कहा कि उनका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन उद्योग को निशाना बनाना था. उन्होंने जानबूझकर बर्लिन के संपन्न इलाकों को प्रभावित करने का दावा किया और लिखा कि वे इसके लिए कम संपन्न निवासियों से माफी मांगते हैं.
वर्तमान में अब भी करीब 31,000 परिवारों के घरों में बिजली बहाल नहीं हो सकी है, जिससे मानवीय संकट बढ़ने की आशंका है. पुलिस ने हमलावरों की तलाश के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है और प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है.
जर्मनी में पिछले साल सौर और पवन ऊर्जा से बनी 45 फीसदी बिजली
जर्मनी के ऊर्जा क्षेत्र के लिए साल 2025 निर्णायक साबित हुआ है. जर्मन सौर उद्योग संघ (बीएसडब्ल्यू) द्वारा सोमवार, 5 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर 18 फीसदी हो गई है, जो पिछले वर्ष के 14 फीसदी के मुकाबले एक महत्वपूर्ण वृद्धि है.
इस बढ़त के साथ सौर ऊर्जा ने पहली बार लिग्नाइट (कोयला) और प्राकृतिक गैस जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को पीछे छोड़ दिया है, जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः 14 फीसदी और 16 फीसदी रही. वर्तमान में पवन ऊर्जा (27 फीसदी) के बाद सौर ऊर्जा जर्मनी का दूसरा सबसे बड़ा बिजली स्रोत बन गई है.
आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में अब तक स्थापित 55 लाख से अधिक सौर प्रणालियों ने पिछले वर्ष रिकॉर्ड 87 टेरावॉट घंटे बिजली का उत्पादन किया. यह उत्पादन 2024 की तुलना में 15 टेरावॉट घंटे अधिक है. सौर और पवन ऊर्जा के इस मजबूत प्रदर्शन के कारण जर्मनी के सार्वजनिक ग्रिड में नवीकरणीय स्रोतों का कुल योगदान अब लगभग 56 फीसदी तक पहुंच गया है.
बीएसडब्ल्यू के अनुसार, सौर क्षेत्र में विस्तार की वर्तमान गति जर्मनी के 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक सौर क्षमता को 215 गीगावाट तक पहुंचाना है, लेकिन 2025 में विस्तार की दर उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी.
ईरान में महंगाई के खिलाफ जारी प्रदर्शनों में 20 की मौत, ट्रंप ने दी "भीषण हमले" की चेतावनी
ईरान में बढ़ते खर्च और चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह में बदल गए हैं. प्रदर्शनों के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करते ही हिंसा और तेज हो गई है, जिसमें अब तक कम से कम 20 लोगों के मारे जाने की खबर है.
मानवाधिकार समूहों के अनुसार, यह अशांति ईरान के 31 में से 26 प्रांतों तक फैल चुकी है और सुरक्षा बलों ने अब तक 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है. तेहरान और शिराज जैसे प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारी न केवल महंगाई, बल्कि शासन परिवर्तन की भी मांग कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को सीधी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है. एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि ईरानी शासन अपने ही नागरिकों की हत्या जारी रखता है, तो अमेरिका की ओर से उन्हें बहुत करारा जवाब मिलेगा.
इस विद्रोह की मुख्य वजह ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था है. संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों और इस्राएल के साथ हालिया संघर्ष के बाद ईरानी मुद्रा रियाल पूरी तरह ढह गई है, जहां एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 14.5 लाख रियाल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. देश में महंगाई दर 40 फीसदी से ऊपर है और मांस-चावल जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं.
जीतू पटवारी बोले, इंदौर में दूषित पानी से 30 से अधिक मौतें हुईं
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में बीजेपी सरकार की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया कि दूषित पानी पीने के चलते 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं लेकिन सरकार वास्तविक संख्या बाहर नहीं आने दे रही है. उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को पद से हटाने और मेयर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है.
उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “17 मौतें नहीं हुई हैं, मौत 30 से ज्यादा हुई हैं. चूंकि प्रशासन और बीजेपी के गुंडे मीडिया को वहां जाकर अवलोकन करने से रोकते हैं. अगर एक-एक घर की रेकी होगी, सत्यापन होगा, तब जाकर पता चलेगा कि कितनी मौतें हुई हैं.” पटवारी ने इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं, लेकिन कभी इन्होंने इसका दायित्व नहीं निभाया.
इंदौर में दूषित पानी के चलते हुई मौतों की संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति है. इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि 4 जनवरी तक डायरिया की वजह से छह मौतें हुई थीं. उन्होंने कहा कि मौतों की आधिकारिक संख्या का पता लगाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है. वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में अब तक दूषित पानी पीने के चलते 17 मौतें होने की बात कही जा रही है.
मादुरो की "जबरन गिरफ्तारी" को चीन ने बताया "एकतरफा दादागिरी"
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार, 5 जनवरी को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन, अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस की "जबरन गिरफ्तारी" से गंभीर रूप से चिंतित है. चीन ने अमेरिका से अपील की है कि वह मादुरो और उनकी पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उन्हें बिना शर्त तुरंत रिहा करे.
बीजिंग ने चेतावनी दी है कि किसी संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल का ऐसा प्रयोग न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है, बल्कि यह लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की शांति के लिए भी एक बड़ा खतरा है.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कोई भी देश दुनिया का पुलिसकर्मी या जज नहीं बन सकता." उन्होंने अमेरिका की इस कार्रवाई को 'एकतरफा दादागिरी' करार दिया और कहा कि किसी देश की इच्छा दूसरे पर थोपना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है.
चीन ने स्पष्ट किया कि वह वेनेजुएला की सरकार के साथ अपना सहयोग जारी रखेगा और इस संकट को सैन्य हस्तक्षेप के बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर देता है.
चीन और वेनेजुएला के बीच पिछले दो दशकों से गहरी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी रही है. चीन वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार होने के साथ-साथ वहां का सबसे बड़ा करदाता और निवेशक भी है. रूस, ईरान और ब्राजील जैसे देशों ने भी चीन के सुर में सुर मिलाते हुए इस अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है.
फिलहाल, निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क की एक जेल में रखा गया है, जहां 5 जनवरी को उन्हें पहली बार कोर्ट में पेश किया जाना है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भी इस मुद्दे पर एक आपातकालीन सत्र बुलाया गया है.
आठ साल में 15वीं बार जेल से बाहर आया राम रहीम
बलात्कार के अपराध में 20 साल की सजा काट रहा गुरमीत राम रहीम सिंह सोमवार, 5 जनवरी को हरियाणा की सुनारिया जेल से पैरोल पर बाहर आ गया. उसे 40 दिन की पैरोल दी गई है और इस दौरान वह सिरसा स्थित अपने आश्रम में रहेगा. द हिंदू की खबर के मुताबिक, 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद से अब तक वह 15 बार जेल से बाहर आ चुका है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, 40 दिन की हालिया पैरोल को मिलाकर, राम रहीम को अब तक 405 दिन की पैरोल या फरलो दी जा चुकी है. वह अक्टूबर 2020 में पहली बार एक दिन के लिए जेल से बाहर आया था. लेकिन साल 2022 से 2025 तक, वह 12 बार जेल से बाहर आया. यानी इन चार सालों के दौरान, वह हर साल तीन बार जेल से बाहर आया और हर साल 91 दिन जेल से बाहर बिताए.
राम रहीम को अगस्त 2017 में उसके आश्रम की ही दो महिला अनुयायियों का बलात्कार करने का दोषी पाया गया था और 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी. 2019 में उसे एक पत्रकार की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया. इसके बाद अक्टूबर 2021 में उसे आश्रम के ही एक पूर्व कर्मचारी की हत्या में शामिल होने का भी दोषी पाया गया था और आजीवन कारावास की सजा दी गई थी.
वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप की नए हमले की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए एक और सैन्य हमले की धमकी दी है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगर वेनेजुएला अपनी तेल नीति और नशीली दवाओं की तस्करी रोकने में अमेरिका का पूरा सहयोग नहीं करता, तो वे फिर से सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. ट्रंप के अनुसार, अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला को "ठीक" करने की कमान संभालेगा और सही समय आने पर ही वहां लोकतांत्रिक चुनाव कराए जाएंगे.
इस भारी दबाव के बीच वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने पहली बार सुलह के संकेत दिए हैं. उन्होंने अमेरिका के साथ साझा विकास और सम्मानजनक संबंधों पर आधारित एजेंडे पर काम करने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, इससे पहले उन्होंने शनिवार को हुई अमेरिकी सैन्य छापेमारी को देश के संसाधनों पर अवैध कब्जा बताया था, लेकिन ट्रंप की कड़ाई के बाद अब वेनेजुएला की अंतरिम सरकार सहयोग की बात कर रही है.
ट्रंप ने इस कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पड़ोसी देशों मेक्सिको, कोलंबिया और क्यूबा को भी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि मेक्सिको और कोलंबिया को अपने यहां से होने वाली ड्रग तस्करी को तुरंत रोकना होगा, वरना वहां भी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना बनी रहेगी. साथ ही उन्होंने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार के पतन की भी भविष्यवाणी की. फिलहाल, गिरफ्तार किए गए निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहां उन पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा.
पुतिन के घर ड्रोन हमला होने के रूसी आरोपों को ट्रंप ने किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार (4 जनवरी, 2026) को स्पष्ट किया कि अमेरिकी जांच में इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यूक्रेन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के किसी आवास को निशाना बनाया था. ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "अब जब हमने जांच कर ली है, तो हमें नहीं लगता कि ऐसा कोई हमला हुआ था." उन्होंने स्वीकार किया कि पुतिन के आवास के आस-पास कुछ हुआ था, लेकिन वह टार्गेट किया हुआ हमला नहीं था.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने उत्तर-पश्चिमी नोवगोरोद क्षेत्र में पुतिन के राजकीय आवास पर 91 ड्रोनों से हमला किया था. रूस ने इस कथित घटना को राज्य प्रायोजित आतंकवाद करार दिया था. रूस ने कहा कि उनके रक्षा तंत्र ने सभी ड्रोनों को मार गिराया और अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को सबूत के तौर पर मलबे के वीडियो भी सौंपे.
शुरुआत में ट्रंप ने इन रिपोर्टों पर गहरी नाराजगी जताई थी और इसे शांति वार्ता में बाधा बताया था. उन्होंने यहां तक कहा था कि वे पुतिन की बात सुनकर "बहुत गुस्से" में थे. हालांकि, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन आरोपों को "झूठ" बताया. उन्होंने कहा कि रूस शांति प्रयासों को पटरी से उतारने और यूक्रेन पर भविष्य के हमलों को जायज ठहराने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी बना रहा है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पाया कि यूक्रेन वास्तव में उसी क्षेत्र के एक सैन्य लक्ष्य को निशाना बना रहा था जिसे उसने पहले भी हिट किया था. वह लक्ष्य पुतिन के आवास के करीब जरूर था, लेकिन आवास उसका मुख्य निशाना नहीं था.













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