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Bhopal Gas Tragedy 36th Anniversary: भोपाल गैस पीड़ितों में देखी जा रही है मोटापा की समस्या, थायरॉयड संबंधित बीमारियों की दर 1.92 गुणा बढ़ी

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में वर्ष 1984 में हुए गैस हादसे के दुष्प्रभाव अभी भी लोगों पर नजर आ रहे हैं. मोटापा और थायरॉयड बड़ी समस्या बनती जा रही है इन पीड़ितों में यह बात आंकड़ों के एक अध्ययन से सामने आई है. सम्भावना ट्रस्ट का काम 30 हजार से अधिक दानदाताओं के चन्दे से चलता है.

Bhopal Gas Tragedy 36th Anniversary: भोपाल गैस पीड़ितों में देखी जा रही है मोटापा की समस्या, थायरॉयड संबंधित बीमारियों की दर 1.92 गुणा बढ़ी
भोपाल गैस (Photo Credits: Twitter)

भोपाल, 1 दिसंबर: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में वर्ष 1984 में हुए गैस हादसे के दुष्प्रभाव अभी भी लोगों पर नजर आ रहे हैं. मोटापा और थायरॉयड बड़ी समस्या बनती जा रही है इन पीड़ितों में यह बात आंकड़ों के एक अध्ययन से सामने आई है. भोपाल (Bhopal) में यूनियन कार्बाइड हादसे की 36 वीं बरसी के मौके पर सम्भावना ट्रस्ट क्लीनिक के सदस्यों ने आंकड़ों के अध्ययन में पाया है कि हादसे के पीड़ितों में सामान्य से अधिक मोटापा और थायरॉयड की समस्या है.

इस अध्ययन का ब्यौरा देते हुए चिकित्सक डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बताया, हमारे क्लीनिक में पिछले 15 वर्षों से इलाज ले रहे 27,155 गैस पीड़ितों व अन्य लोगों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह पाया है कि यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैसों से पीड़ित लोगों में अधिक वजन व मोटापा होने की सम्भावना सामान्य लोगों से 2.75 (दो दशमलव 75) गुणा ज्यादा है, वहीं थायरॉइड सम्बंधित बीमारियों की दर 1.92 (एक दशमलव 92) गुणा ज्यादा है.

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सम्भावना ट्रस्ट के प्रबन्धक न्यासी सतीनाथ षडंगी ने कहा कि गैस पीड़ितों में मोटापा ज्यादा होने से उनमें डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, जोड़ों का दर्द और जिगर, गुर्दे, स्तन और गर्भाशय के कैन्सर व अन्य बीमारियों का खतरा ज्यादा होने की आशंका है. गैस पीड़ितों में थायरायड बीमारियों की दर लगभग दो गुनी पायी जाना यह दर्शाता है कि गैस कांड की वजह से पीड़ितों के शरीर के अन्य तन्त्रों के साथ साथ, अंतस्त्रावी तन्त्र को भी स्थाई नुकसान पहुंचा है.

क्लीनिक की सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता तबस्सुम आरा ने बताया कि सम्भावना ट्रस्ट क्लीनिक और चिंगारी पुनर्वास केन्द्र के कार्यकर्ताओं ने पिछले 8 महीनों में कोरोना महामारी से जूझने के लिए 42 हजार की कुल आबादी वाले 15 मोहल्लों में जागरूकता फैलाने, समुदाय से स्वास्थ्य स्वयंसेवी बनाने, जरूरतमंदों का विशेष ख्याल रखने और कोरोना की जांच और इलाज में मदद पहुंचाने का काम किया है.

ज्ञात हो कि 1996 में यूनियन कार्बाइड के पीड़ितों के मुफ्त इलाज के लिए स्थापित सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक ने अभी तक 25,348 गैस पीड़ितों और यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से प्रदूषित भूजल से पीड़ित 7,449 लोगों का इलाज किया है. सम्भावना ट्रस्ट का काम 30 हजार से अधिक दानदाताओं के चन्दे से चलता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 02, 2020 09:38 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).