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छत्तीसगढ़ में स्वावलंबी होते 'गौठान' बने रोजगार के केंद्र

छत्तीसगढ़ में स्थापित किए गए गौठान समय के साथ स्वावलंबी हो रहे हैं और ये स्थान रोजगार के केंद्रों में भी बदल रहे हैं. तो वहीं राज्य में पशुपालकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है.

छत्तीसगढ़ में स्वावलंबी होते 'गौठान' बने रोजगार के केंद्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: PTI)

रायपुर, 6 जुलाई : छत्तीसगढ़ में स्थापित किए गए गौठान समय के साथ स्वावलंबी हो रहे हैं और ये स्थान रोजगार के केंद्रों में भी बदल रहे हैं. तो वहीं राज्य में पशुपालकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है 'सुराजी गांव योजना'. इसके राज्य में गौठान स्थापित किए जाने का क्रम जारी है. राज्य में अब तक स्थापित 8408 गौठानों में से 3089 गौठान स्वावलंबी हो गए हैं.

संयुक्त संचालक कृषि एवं गोधन न्याय योजना के सहायक नोडल अधिकारी आर.एल. खरे ने बताया कि स्वावलंबी गौठान गोबर खरीदी से लेकर वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण के लिए स्वयं के पास उपलब्ध राशि का उपयोग करने लगे हैं. स्वावलंबी गौठानों में शासन से राशि की मांग किए बिना 15.93 करोड़ रुपये का गोबर भी स्वयं की राशि से खरीदा गया है. गौरतलब है कि राज्य में पशुधन के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा अब तक 10624 गांवों में गौठान के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसमें से 8408 गौठानों का निर्माण पूरा हो चुका है और वहां पर गोबर खरीदी, वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण सहित अन्य आयमूलक गतिविधियां संचालित हो रही हैं. इस समय 1779 गौठानांे का तेजी से निर्माण कराया जा रहा ह,ै शेष 444 गौठानांे के निर्माण का कार्य अभी शुरू कराया जाना है. यह भी पढ़ें : Uttar Pradesh: Wife-Swapping Parties में पत्नी को जबरन ले जाता था पति, मामला दर्ज करने का आदेश

राज्य में गौठान डे केयर पशु इकाइयां हैं, जहां पशुधन के देखरेख, चारे-पानी एवं उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. गौठानों में पशुओं के लिए हरे चारे के प्रबंध के लिए हाईब्रिड नेपियर ग्रास का रोपण एवं अन्य चारे की बुआई कर चारागाह का विकास लगातार किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की रीढ़ बन गई है. यह योजना इस समय गांवों में आय एवं रोजगार का प्रभावी विकल्प बन गई है. यही वजह है कि बीते एक सालों में राज्य में निर्मित एवं संचालित गौठानों की संख्या में 44 फीसदी की वृद्धि हुई है, जिसके चलते गौठानों की संख्या 5,847 से बढ़कर 8,408 हो गई है. गोधन न्याय योजना के तहत लाभान्वित पशुपालकों की संख्या में भी 24 फीसद का इजाफा हुआ है. गौठानों में गोबर बेचने वाले ग्रामीण पशुपालक की संख्या एक साल में 1,70,508 से बढ़कर 2,11,540 हो गई है. गोधन न्याय योजनांतर्गत पंजीकृत पशुपालकों की संख्या 3,10,073 है.

गौरतलब है कि राज्य में 20 जुलाई 2020 से गोधन न्याय योजना की शुरूआत की गई है. इस योजना के तहत पशुपालकों एवं ग्रामीणों से गौठानों में दो रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है. क्रय गोबर से महिला स्व-सहायता समूह वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट प्लस तैयार करने के साथ ही दीया, गमला, अगरबत्ती, गुलाल सहित अन्य सामग्री तैयार कर रही है. गोबर से प्राकृतिक पेंट एवं पुटटी उत्पादन का काम भी रायपुर के समीप हीरापुर-जरवाय गौठान में शुरू कर दिया गया है. गोबर से विद्युत उत्पादन की भी शुरुआत रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा जिले के गौठानों में की जा चुकी है.

गोबर से प्राकृतिक पेंट और पुट्टी बनाने के लिए राज्य के 75 चयनित गौठानों में मशीनें लगाई जा रही हैं. गौठानों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित कर वहां प्रोसेसिंग यूनिटें भी लगाई जा रही हैं. राज्य के 227 गौठानों में तेल मिल एवं 251 गौठानों में दाल मिल स्थापना का काम तेजी जारी है. गोधन न्याय योजना के तहत 30 जून 2022 तक की स्थिति में 75.38 लाख क्विंटल गोबर क्रय किया जा चुका है, जिसके एवज में गोबर विक्रेताओं को 147 करोड़ 6 लाख रूपए का भुगतान किया गया है. योजना के तहत गौठान समितियों एवं स्व-सहायता समूहों को लाभांश के रूप में 136 करोड़ चार लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 06, 2022 11:32 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).