PM नरेंद्र मोदी के स्कूल के दोस्त असगर अली वोहरा को बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता से जमीन वापस मिली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 81 वर्षीय स्कूली सहपाठी असगर अली वोहरा को महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर स्थित उनकी विवादित जमीन वापस मिल गई है. दशकों पुराने संपत्ति विवाद और अवैध कब्जे को लेकर वोहरा ने 8 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर हस्तक्षेप और सीबीआई (CBI) जांच की मांग की थी

पीएम नरेंद्र मोदी, असगर अली वोरा (Photo Credits: X/@richapintoi)

मुंबई/मीरा-भायंदर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के बचपन के सहपाठी को अपनी पुश्तैनी जमीन वापस पाने के लिए 15 साल से अधिक लंबा कानूनी संघर्ष लड़ना पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री से मुलाकात के महज सात दिनों के भीतर इस विवाद का चौंकाने वाला समाधान निकल आया है. गुजरात के वडनगर स्थित बी.एन. हाई स्कूल में प्रधानमंत्री मोदी के साथ पढ़ाई कर चुके 81 वर्षीय असगर अली वोहरा (Asgar Ali Vohra) की जमीन पर दावा छोड़ने का ऐलान भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता ने कर दिया है.

India Today की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद नरेंद्र मेहता से जुड़ी निर्माण कंपनी ने न सिर्फ जमीन का कब्जा छोड़ दिया है, बल्कि मीरा-भायंदर नगर निगम (MBMC) से मिली निर्माण अनुमति को भी रद्द करने का पत्र सौंप दिया है. यह भी पढ़ें: BRICS Summit: दिल्ली में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल समापन, PM मोदी ने शामिल नेताओं का दिल से जताया आभार; VIDEO

क्या था भायंदर ईस्ट का 15 साल पुराना जमीन विवाद?

असगर अली वोहरा ने 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई थी:

पीएम से मुलाकात के बाद मंत्रालय में बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक

The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, वोहरा की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राज्य सरकार ने तत्काल दखल दिया:

नरेंद्र मेहता ने निर्माण अनुमति की सरेंडर, वापस ली पुलिस शिकायत

बैठक के तुरंत बाद भाजपा नेता नरेंद्र मेहता ने औपचारिक कदम उठाए:

दशकों लंबे संघर्ष का हुआ अंत

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी पूर्व में प्रधानमंत्री मोदी और असगर अली वोहरा की मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए भरोसा जताया था कि प्रधानमंत्री अपने पुराने सहपाठी को न्याय दिलाएंगे.

सत्तारूढ़ दल के कद्दावर नेता द्वारा निर्माण अनुमति सरेंडर करने और कब्जा छोड़ने के इस कदम को 81 वर्षीय बुजुर्ग की लंबी कानूनी लड़ाई की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है.

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