Noida Schools Health Advisory: स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच नोएडा के स्कूलों में अलर्ट; बीमार बच्चों को घर पर रखने की सख्त सलाह
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) में स्वाइन फ्लू (H1N1) और डेंगू के मामलों में वृद्धि को देखते हुए जिले के कई निजी व सरकारी स्कूलों ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं. स्कूल प्रशासनों ने अभिभावकों के लिए विस्तृत स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्दी, खांसी, तेज बुखार या फ्लू जैसे लक्षणों वाले बच्चों को पूरी तरह ठीक होने तक स्कूल न भेजें.
नोएडा: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मौसमी बीमारियों, विशेष रूप से स्वाइन फ्लू (H1N1) और डेंगू के बढ़ते प्रसार के मद्देनजर गौतमबुद्ध नगर जिले के स्कूलों ने सतर्कता बढ़ा दी है. स्कूलों में संक्रमण को फैलने से रोकने और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों ने अभिभावकों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल प्रशासनों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल अटेंडेंस (उपस्थिति) बनाए रखने के लिए बीमार बच्चों को कक्षाओं में न भेजें, बल्कि उनके पूर्ण स्वस्थ होने तक घर पर रखकर आराम और उचित इलाज सुनिश्चित करें. यह भी पढ़ें: Delhi H1N1 Surge: दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों में भारी उछाल, आंकड़ा 1,777 तक पहुंचा; जानिए लक्षण, जोखिम और रोकथाम के उपाय
बीमार बच्चों को घर पर रखने और डॉक्टरी सलाह की हिदायत
स्कूलों द्वारा जारी सर्कुलर में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि यदि बच्चों में सर्दी-जुकाम, गले में खराश, बुखार या फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें घर पर ही आइसोलेट रखें:
- रिकवरी तक आराम: लक्षण समाप्त होने और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही बच्चों को स्कूल भेजा जाए.
- लक्षणों की अनदेखी न करें: यदि बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श लें.
- संक्रमण की रोकथाम: बीमार बच्चे को स्कूल भेजने से सहपाठियों और शिक्षकों में भी संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ जाता है.
कक्षाओं में व्यक्तिगत स्वच्छता और हैंड हाइजीन पर जोर
स्कूलों में छात्रों को मौसमी संक्रमणों से बचाव के व्यावहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं:
- हाथ धोने की आदत: बच्चों को भोजन से पहले और खेल गतिविधियों के बाद नियमित रूप से साबुन-पानी से हाथ धोने या हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
- चेहरे को न छूने की सलाह: छात्रों को बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने की हिदायत दी जा रही है.
- क्लासरूम सैनिटाइजेशन: कक्षाओं, डेस्क और सामान्य उपयोग वाले क्षेत्रों में नियमित सफाई और कीटाणुशोधन (Sanitisation) कराया जा रहा है.
डेंगू की रोकथाम: परिसर में जलभराव और लार्वा की नियमित जांच
डेंगू के प्रसार को रोकने के लिए स्कूल परिसरों में विशेष निगरानी रखी जा रही है:
- सघन निरीक्षण: वॉटर कूलर, गमलों की ट्रे, छत, खुले नालों और बारिश का पानी जमा होने वाले संभावित स्थानों की दैनिक जांच की जा रही है.
- एंटी-लार्वा छिड़काव: यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कहीं भी स्थिर पानी जमा न रहे, क्योंकि ठहरा हुआ साफ पानी भी एडीज मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन सकता है.
अभिभावक-स्कूल समन्वय से रोकथाम संभव
स्कूल प्रबंधनों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों, स्कूल की सतर्कता और अभिभावकों के सक्रिय सहयोग से ही बच्चों को मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है. स्कूलों ने दोहराया है कि बच्चों की शैक्षणिक निरंतरता महत्वपूर्ण है, लेकिन उनका स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.