Aadhaar Card Update: क्या आधार कार्ड में बार-बार बदली जा सकती है जन्मतिथि? UIDAI ने जारी किए नए व कड़े दिशानिर्देश
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार कार्ड में जन्मतिथि अपडेट करने के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है. यूआईडीएआई के अनुसार, हालांकि जन्मतिथि सुधार के लिए कोई तय संख्यात्मक सीमा नहीं है, लेकिन पहली बार के बदलाव के बाद दोबारा जन्मतिथि अपडेट कराने की प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया गया है.
नई दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि (Date of Birth) में संशोधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सामान्य परिस्थितियों में जन्मतिथि में बार-बार बदलाव की अनुमति नहीं दी जाती है. हालांकि, तकनीकी या मानवीय त्रुटियों के सुधार के लिए कोई निश्चित सीमा तय नहीं है, लेकिन पहली बार के संशोधन के बाद आगे के बदलावों के लिए कड़े नियमों और विशेष सत्यापन प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा.
यूआईडीएआई का कहना है कि यह सख्त व्यवस्था पहचान की प्रमाणिकता बनाए रखने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाले दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू की गई है. यह भी पढ़ें: UIDAI का बड़ा फैसला: बंद होने जा रहा है पुराना mAadhaar ऐप, एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स के साथ लॉन्च हुआ नया आधार एप्लीकेशन
पहली बार जन्मतिथि अपडेट कराने के नियम
मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पहली बार जन्मतिथि में बदलाव केवल कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में ही स्वीकार किया जाता है:
- घोषित या अनुमानित स्थिति: यदि मौजूदा रिकॉर्ड में जन्मतिथि "Declared" या "Approximate" के रूप में दर्ज है.
- ऑपरेटर की गलती: यदि प्रारंभिक नामांकन (Enrollment) के समय ऑपरेटर से डेटा एंट्री में कोई मानवीय त्रुटि हुई हो.
- दस्तावेजी आवश्यकताएं: 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्क नागरिक यूआईडीएआई द्वारा स्वीकृत किसी भी वैध जन्म प्रमाण दस्तावेज के आधार पर पहली बार बदलाव करा सकते हैं. वहीं, 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों के लिए औपचारिक जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) अनिवार्य है (अनिवासी भारतीय नाबालिगों के लिए भारतीय पासपोर्ट भी मान्य है).
UIDAI ने जन्म तिथि (DoB) अपडेट करने के बारे में अपडेट शेयर किया
दोबारा बदलाव के लिए सख्त प्रोटोकॉल और अनिवार्य दस्तावेज
यदि किसी नागरिक की जन्मतिथि पहले ही एक बार सत्यापित (Verified) हो चुकी है, तो उसके बाद किसी भी संशोधन को केवल 'अपवाद' मानकर कड़ी जांच से गुजारा जाएगा:
- समान BRN वाला जन्म प्रमाण पत्र: यदि पहली बार जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया था, तो दोबारा संशोधन के लिए उसी रजिस्ट्रार द्वारा जारी और समान बर्थ रजिस्ट्रेशन नंबर (BRN) वाला संशोधित जन्म प्रमाण पत्र और नोटरीकृत हलफनामा (Affidavit) प्रस्तुत करना होगा.
- गैर-बर्थ सर्टिफिकेट के मामले में: यदि पहली बार किसी अन्य दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया था, तो अगली बार के संशोधन के लिए औपचारिक जन्म प्रमाण पत्र और हलफनामा देना अनिवार्य होगा.
- ऑपरेटर की त्रुटि का सुधार: यदि ऑपरेटर की गलती से मूल दस्तावेजों के विपरीत गलत जन्मतिथि दर्ज हो गई थी, तो प्रारंभिक वैध दस्तावेजों के आधार पर सुधार की अनुमति दी जाएगी.
फर्जीवाड़े पर आधार डिएक्टिवेट होने का खतरा
यूआईडीएआई ने नागरिकों को उन मामलों में जन्मतिथि सही करने का अंतिम अवसर भी दिया है, जहां पूर्व में गलत या भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर प्रविष्टि दर्ज कराई गई थी.
हालांकि, इस समीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और सत्यापन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रहेगा:
- आयु विसंगति पर कार्रवाई: यदि समीक्षा में पाया जाता है कि प्रारंभिक नामांकन के समय आवेदक ने अपनी वास्तविक आयु से कम उम्र दर्शाई थी (जैसे 5 वर्ष से अधिक होने पर 0-5 वर्ष वर्ग में नामांकन या 18 वर्ष से अधिक होने पर नाबालिग के रूप में पंजीकरण), तो आवेदन खारिज कर दिया जाएगा.
- पहचान का निलंबन: ऐसी गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति का आधार नंबर स्थायी या अस्थायी रूप से निष्क्रिय (Deactivate) भी किया जा सकता है.
विदेशी नागरिकों के लिए विशेष नियम
भारत में रहने वाले विदेशी निवासियों के लिए जन्मतिथि सुधार के नियम पूरी तरह ऑपरेटर त्रुटियों तक ही सीमित रखे गए हैं. उनके मामले में जन्मतिथि का मिलान उनके मूल पहचान-सह-जन्मतिथि प्रमाण दस्तावेज और स्व-घोषणा (Self-declaration) के आधार पर ही किया जाएगा.