8th Pay Commission: क्या सिविल पेंशनर्स को भी मिलेगा 'वन रैंक वन पेंशन'? 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने रखीं ये बड़ी मांगें
पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को 3 सितंबर 2026 को कार्य करते हुए 10 महीने पूरे हो चुके हैं. आगामी हफ्तों में चंडीगढ़ और बेंगलुरु में कर्मचारी संघों के साथ होने वाली बैठकों के बीच 'सिविल कर्मचारियों के लिए वन रैंक वन पेंशन' और पुराने बनाम नए रिटायर कर्मचारियों के बीच पेंशन विसंगति का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व भत्तों के पुनरीक्षण के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को आज 10 महीने पूरे हो गए हैं. जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस पैनल को सरकार ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना है.
आयोग द्वारा आगामी 16-18 सितंबर को चंडीगढ़ और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों व हितधारकों के साथ बैठकें तय हैं. इन मुलाकातों के बीच रक्षा बलों की तर्ज पर सिविल पेंशनर्स के लिए 'वन रैंक वन पेंशन' (OROP) लागू करने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठ रही है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission & DA Hike: केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार; 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर ताजा अपडेट
क्यों उठ रही है सिविल कर्मचारियों के लिए OROP की मांग?
पेंशनर्स संगठनों का मुख्य तर्क यह है कि समान पद और समान सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद केवल सेवानिवृत्ति की तारीख (Retirement Date) अलग होने के कारण पेंशन में भारी अंतर आ जाता है:
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विसंगति का उदाहरण: यदि पे-मैट्रिक्स के लेवल 6 पर काम करने वाला एक कर्मचारी 2016 में 7वें वेतन आयोग के तहत रिटायर हुआ, तो उसे लगभग ₹24,500 की बेसिक पेंशन (58% महंगाई राहत के साथ कुल करीब ₹38,710) मिलती है.
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वहीं, यदि उसी पद और सेवाकाल वाला दूसरा कर्मचारी 2026 में 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद रिटायर होता है, तो उसकी पेंशन नए पे-स्केल के चलते कहीं अधिक होगी.
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समान काम, समान पेंशन की मांग: सिविल ओआरओपी का मूल उद्देश्य यही है कि एक ही रैंक और समान अर्हक सेवा वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति वर्ष के भेदभाव के बिना समान पेंशन दी जाए.
प्रमुख यूनियनों और पेंशनर एसोसिएशनों की मुख्य मांगें
विभिन्न प्रमुख संगठनों ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे अपने ज्ञापनों में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें रखी हैं:
| संगठन का नाम | मुख्य मांग | पेंशनभोगियों पर संभावित असर |
| मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया | पूर्व सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन का 8वें वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स में समान स्टेज पर 'नोशनल फिक्सेशन' (Notional Fixation) किया जाए। | अलग-अलग वेतन आयोगों के तहत रिटायर हुए कर्मचारियों के बीच पेंशन का अंतर समाप्त होगा और पुराने पेंशनर्स को नए स्तर पर लाया जा सकेगा। |
| भारत पेंशनर्स समाज (BPS) | 1 जनवरी 2026 से पहले और बाद के पेंशनर्स में समानता; अंतिम वेतन का 67% पेंशन; 50% फैमिली पेंशन और ₹45,000 न्यूनतम पेंशन। | सभी पीढ़ियों के पेंशनर्स के लिए सम्मानजनक पेंशन सुनिश्चित होगी और अंतिम वेतन के अनुपात में अधिक सुरक्षा मिलेगी। |
| नेशनल काउंसिल - जेसीएम (NCJCM) | 3.833 फिटमेंट फैक्टर, 2026 से पहले के पेंशनर्स को संशोधित संरचना का विस्तार और हर 5 साल में वेतन/पेंशन समीक्षा। | उच्च फिटमेंट फैक्टर से पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और 5 वर्षीय समीक्षा से महंगाई के बीच बड़ा अंतर पैदा नहीं होगा। |
| रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसायटी (RSCWS) | सिविल सेवाओं में OROP पर विचार और अलग-अलग समयावधि के रिटायर कर्मचारियों की विसंगतियों को दूर करना। | सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर होने वाले असंतोष को खत्म कर समान पद-समान पेंशन का सिद्धांत स्थापित होगा। |
फिटमेंट फैक्टर और 'नोशनल फिक्सेशन' होंगे निर्णायक
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम फैसला फिटमेंट फैक्टर और नोशनल फिक्सेशन के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा:
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फिटमेंट फैक्टर का प्रभाव: यदि NCJCM द्वारा प्रस्तावित 3.833 फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है, तो 2026 में रिटायर होने वाले लेवल 6 कर्मचारी की पेंशन सीधे ₹93,900 के आसपास पहुंच सकती है. इसके विपरीत, 2016 में रिटायर हुआ कर्मचारी पुराने संशोधन के कारण करीब ₹38,710 पर ही अटका रह जाएगा.
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नोशनल रिवीजन की अनिवार्यता: केवल नए रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन बढ़ाने से समानता नहीं आएगी. जब तक पूर्व के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन को नए पे-मैट्रिक्स में 'नोशनल' रूप से पुनः निर्धारित नहीं किया जाता, तब तक यह पेंशन असमानता बनी रहेगी.
आने वाले महीनों में जब वेतन आयोग विभिन्न शहरों में कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ गहन विमर्श करेगा, तब वित्तीय व्यवहार्यता और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ के आधार पर इन प्रस्तावों की दिशा तय होगी.