8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को रेलवे यूनियनों का प्रस्ताव, न्यूनतम वेतन ₹52,600 करने और फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग
भारतीय रेलवे के कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को विस्तृत प्रस्ताव सौंपे हैं. इसमें न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर ₹52,600 करने, फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी और वेतन मैट्रिक्स में बड़े सुधारों की मांग की गई है.
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8th Pay Commission: भारतीय रेलवे के कर्मचारी (Indian Railways Employees) और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) (CPC) के समक्ष अपनी मांगें रख दी हैं. विभिन्न रेलवे यूनियनों ने वेतन मैट्रिक्स (Salary Matrix) में व्यापक बदलाव, फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि और न्यूनतम वेतन संरचना को बढ़ाने को लेकर विस्तृत प्रस्ताव सौंपे हैं. यह कदम वेतन आयोग द्वारा संगठनों से सुझाव (मेमोरांडा) मांगे जाने के बाद उठाया गया है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग 15 जून तक हितधारकों से सुझाव स्वीकार करेगा, जबकि इसकी अंतिम सिफारिशें 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! जुलाई से मिल सकती है 3 फीसदी DA बढ़ोतरी
न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर को लेकर मांगें
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आधुनिक आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए मांग की है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) बढ़ाकर ₹52,600 किया जाना चाहिए। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत यह ₹18,000 है.
दूसरी ओर, रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने कोई निश्चित आंकड़ा तो नहीं दिया, लेकिन कहा कि न्यूनतम वेतन का निर्धारण 1 जनवरी 2026 के मूल्य सूचकांक (Price Index) के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए. संगठन के मुताबिक, इसमें खान-पान, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी के मौजूदा खर्चों को शामिल किया जाना चाहिए.
फिटमेंट फैक्टर (वह गुणक जिससे पुराना मूल वेतन नए वेतन में बदलता है) को लेकर भी अहम सुझाव दिए गए हैं:
- लेवल 1: आईआरटीएसए ने इसके लिए 92 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है.
- लेवल 6, 7 और 8: रेलवे के सुरक्षा श्रेणी के पदों के लिए 50 ($2.92 \times 1.2$) का गुणक सुझाया गया है.
- लेवल 9 से 12: मध्य स्तर के पदों के लिए 80 ($2.92 \times 1.3$) का फिटमेंट फैक्टर अपनाने की मांग की गई है.
वेतन मैट्रिक्स और कैडर ग्रेड का पुनर्गठन
तकनीकी पर्यवेक्षकों की यूनियन ने सीधे 'सीनियर सेक्शन इंजीनियर' (SSE) के रूप में भर्ती होने वाले ग्रेजुएट इंजीनियरों के करियर में ठहराव (Stagnation) का मुद्दा उठाया है. आईआरटीएसए ने 'जूनियर इंजीनियरों' (JEs) के लिए लेवल 7 से शुरू होने वाली पांच-स्तरीय कैडर संरचना लागू करने की मांग की है. साथ ही, एसएसई (SSE) के पदों को ग्रुप-बी (राजपत्रित/Gazetted) का दर्जा देने का अनुरोध किया है ताकि उनकी जिम्मेदारियों और जोखिम भरे काम को सही पहचान मिल सके.
आरएससीडब्ल्यूएस (RSCWS) ने वेतन आयोग से मौजूदा वेतन मैट्रिक्स के विभिन्न स्तरों के बीच वित्तीय अंतर की समीक्षा करने का सुझाव दिया है, ताकि पदोन्नति के समय कर्मचारियों को सुचारू और बेहतर वित्तीय लाभ मिल सके.
वार्षिक वेतन वृद्धि और भत्तों में संशोधन
बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा 3 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) को बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने या सेवा के निश्चित मील के पत्थर पार करने पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने की मांग की है.
इसके अलावा कई विशिष्ट भत्तों में भी संशोधन की मांग की गई है:
- तकनीकी भत्ते: तकनीकी पर्यवेक्षकों के लिए नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम पे और प्रोडक्शन कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (PCO) भत्ते की मांग की गई है.
- कल्याणकारी भत्ते: महानगरों में रहने के ऊंचे खर्च को देखते हुए मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ता (Transport Allowance) की नए सिरे से समीक्षा करने का आग्रह किया गया है.
विचार-विमर्श की प्रक्रिया और समयसीमा
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन की सदस्यता वाला यह आयोग आने वाले महीनों में आर्थिक संकेतकों, जनसांख्यिकीय डेटा और मिले सुझावों का विश्लेषण करेगा.
हालांकि रेलवे ने हाल ही में मौजूदा 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ते (DA) को 2 प्रतिशत बढ़ाकर मूल वेतन का 60 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन व्यापक संरचनात्मक बदलाव 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर ही निर्भर करेंगे. ऐतिहासिक रूप से, आयोग की सिफारिशें सौंपे जाने के बाद सरकार द्वारा इसके मूल्यांकन और प्रशासनिक क्रियान्वयन में दो से तीन साल का समय लग जाता है. इसका मतलब है कि नया वेतन ढांचा पूरी तरह से 2029 या 2030 तक ही जमीन पर लागू हो पाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 13, 2026 09:42 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

