Article 370 Abrogation 7 Years: धारा 370 हटने के 7 साल बाद कितना बदला कश्मीर? शांति, विकास और आम जीवन में आए बदलावों पर रिपोर्ट
5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के 7 साल पूरे हो चुके हैं. इस दौरान घाटी में शांति, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, निर्बाध शिक्षा, पर्यटन का पुनरुत्थान और शासन में पारदर्शिता जैसे बुनियादी बदलाव दर्ज किए गए हैं, जिससे आम कश्मीरियों का जीवन पटरी पर लौटा है.
नई दिल्ली / श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) से संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त किए जाने के 7 साल पूरे होने पर सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर घाटी में आम नागरिकों की दिनचर्या में व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखा गया है. 5 अगस्त 2019 के बाद से बुनियादी ढांचे, पारदर्शी शासन, निर्बाध शिक्षा, कनेक्टिविटी, पर्यटन और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में सुधार को इस परिवर्तन का प्रमुख संकेतक माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषक इस्रार शाहिद द्वारा 'ग्लोबल कश्मीर' में प्रकाशित एक लेख पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 7 वर्षों में घाटी का सबसे बड़ा हासिल आम जीवन में सामान्य स्थिति (Normalcy) और शांति की वापसी है.
अनिश्चितता से स्थिरता की ओर: आम कश्मीरी का अनुभव
1990 और 2000 के दशक में पली-बढ़ी पीढ़ी के लिए कश्मीर में रहने का मतलब अक्सर अनिश्चितता, अचानक बंद होने वाले बाजार, हड़तालें, पथराव और लंबे समय तक बंद रहने वाले स्कूल-कॉलेज थे. बंद का सबसे ज्यादा खामियाजा दिहाड़ी मजदूरों, छोटे दुकानदारों, छात्रों और सामान्य परिवारों को भुगतना पड़ता था.
रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के बाद से लगातार कई वर्षों तक शैक्षणिक संस्थानों में बिना किसी बड़े व्यवधान के पढ़ाई जारी रही है. लगातार स्कूल खुलने से बच्चों का शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित हुआ है, जिससे स्थानीय अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है.
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा उछाल
पिछले 7 वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आई है:
- सड़क एवं फ्लाईओवरों का निर्माण: श्रीनगर में जहांगीर चौक-रामबाग फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स जो पहले वर्षों तक लटके रहते थे, अब तय समय-सीमा में पूरे हो रहे हैं. सनत नगर, नौगाम, संग्राम और डेलिना में नई सड़कों और उड़ानों ने यातायात को सुगम बनाया है.
- दूरस्थ इलाकों में बिजली: गुरेज जैसे सीमावर्ती इलाकों में नवंबर 2023 में पहली बार ग्रिड से बिजली पहुंचाई गई.
- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक: चिनाब ब्रिज और अंजी खड्ड ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूनों के साथ कश्मीर को सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ा गया है.
पर्यटन का पुनरुत्थान और आर्थिक लाभ
सुरक्षा स्थिति में सुधार के कारण कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पहलगाम, गुलमर्ग और सोनमर्ग के अलावा अब गुरेज जैसी कम चर्चित जगहें भी पर्यटकों के नक्शे पर उभरी हैं.
पर्यटन क्षेत्र के फिर से जीवंत होने से होटल मालिकों के साथ-साथ टैक्सी चालकों, गाइडों, हस्तशिल्प कारीगरों और छोटे दुकानदारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है. इसके साथ ही बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा की फिल्मों की शूटिंग का दौर भी घाटी में वापस लौटा है.
डिजिटल गवर्नेंस और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)
प्रशासनिक सुधारों के तहत डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन प्रमाण पत्र प्रणालियों और शिकायत निवारण पोर्टलों ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर दी है. Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सरकारी योजनाओं की सब्सिडी, छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है, जिससे भ्रष्टाचार में भारी कमी आई है.
चुनौतियां और भविष्य की राह
रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि प्रगति के बावजूद कई चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. युवाओं के बीच बेरोजगारी एक प्रमुख चिंता का विषय है, जिस पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है.
फिर भी, आम कश्मीरी अब अचानक हड़तालों के डर के बिना व्यापार विस्तार, उच्च शिक्षा, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और स्टार्टअप्स की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं. 5 अगस्त 2019 के बाद के 7 साल भय से आशा और अनिश्चितता से संभावनाओं की ओर संक्रमण का प्रतिनिधित्व करते हैं.