देश

Kerala Fishermen: केरल में 11 वर्षों में समुद्री हादसों में 469 मछुआरों की मौत, 160 लापता; 47,000 से अधिक को बचाया गया

केरल मत्स्य पालन मंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2025-26 के बीच समुद्र से जुड़े हादसों में 469 मछुआरों की जान गई और 160 लापता हुए. इस दौरान चलाए गए 5,072 बचाव अभियानों में 47,773 मछुआरों को सुरक्षित भी बचाया गया.

Kerala Fishermen: केरल में 11 वर्षों में समुद्री हादसों में 469 मछुआरों की मौत, 160 लापता; 47,000 से अधिक को बचाया गया
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo\ANI)

तिरुवनंतपुरम: केरल के मत्स्य पालन मंत्री कार्यालय (Office of Keralam Fisheries Minister) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2025-26 के बीच पिछले 11 वर्षों के दौरान राज्य में समुद्र से संबंधित दुर्घटनाओं में 469 मछुआरों की जान चली गई और 160 मछुआरे लापता दर्ज किए गए.

'केरल मरीन फिशरीज रेस्क्यू' (Keralam Marine Fisheries Rescue) (KMFR) कार्यक्रम के तहत संकलित इन आंकड़ों में बड़े पैमाने पर चलाए गए राहत एवं बचाव कार्यों का विवरण भी दिया गया है. इस 11 साल की अवधि में विभिन्न एजेंसियों द्वारा कुल 5,072 समुद्री बचाव अभियान चलाए गए, जिनके माध्यम से 47,773 मछुआरों को सुरक्षित बचा लिया गया. 

मौत और गुमशुदगी के आंकड़े

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि समीक्षाधीन अवधि के दौरान:

  • सर्वाधिक मौतें: वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक 55 मछुआरों की मौत हुई. इससे पहले 2023-24 में 54 और 2024-25 में 49 मौतों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था.
  • सर्वाधिक गुमशुदगी: एक वर्ष में सबसे अधिक मछुआरों के लापता होने के मामले 2017-18 में दर्ज किए गए, जब 29 मछुआरे समुद्र में लापता हो गए थे. इसके बाद 2016-17 और 2021-22 में 26-26 मछुआरे लापता हुए थे.

बचाव अभियानों (Rescue Operations) का रिकॉर्ड

घातक हादसों की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद तटीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशनों में कई लोगों की जान बचाई गई.

वर्ष 2025-26 के दौरान अधिकारियों ने 560 बचाव अभियान चलाकर रिकॉर्ड 6,556 मछुआरों को बचाया, जो कि 11 वर्षों में किसी एक वर्ष में बचाए गए लोगों की सबसे बड़ी संख्या है. वहीं, 2023-24 में सबसे अधिक 618 बचाव अभियान चलाए गए थे, जिनमें 5,741 मछुआरों को सुरक्षित निकाला गया था. इसके अलावा 2022-23 में 602 अभियानों के जरिए 5,902 लोगों को बचाया गया.

कैसे काम करती है तटीय सुरक्षा व्यवस्था?

'केरल मरीन फिशरीज रेस्क्यू' (KMFR) कार्यक्रम आपातकालीन परिस्थितियों में मछुआरों के लिए त्वरित सहायता समन्वय प्रणाली के रूप में काम करता है.

खराब मौसम और आपात स्थिति के दौरान मत्स्य पालन विभाग, भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard), भारतीय नौसेना (Indian Navy) और मरीन एनफोर्समेंट विंग की संयुक्त टीमों द्वारा ये अभियान चलाए जाते हैं.

केरल में समुद्री जोखिम और पृष्ठभूमि

केरल में देश की सबसे बड़ी मछुआरा आबादियों में से एक निवास करती है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मछुआरे आजीविका के लिए अरब सागर में उतरते हैं.

मानसून और खराब मौसम के दौरान केरल के तटीय इलाकों में तेज हवाएं, ऊंची लहरें और समुद्र में उफान की स्थिति बनी रहती है. इस मौसम में नावों के पलटने या भटकने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे तटीय इलाकों में लगातार निगरानी और सुरक्षा अलर्ट की आवश्यकता रहती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 07, 2026 03:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).