UPI Payment Charges: 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI लेनदेन पर लग सकता है चार्ज; NPCI जल्द जारी कर सकता है गाइडलाइंस, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट या शुल्क लगाने को लेकर अगले एक सप्ताह के भीतर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। यह कदम वित्त मंत्रालय द्वारा 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007' के तहत जारी उस आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के बाद सामने आया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान और रूपे डेबिट कार्ड पर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं लगाया जा सकता.
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नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन और यूपीआई तंत्र की वित्तीय स्थिरता को लेकर बड़ा नीतिगत कदम उठाया जा रहा है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) अगले एक सप्ताह के भीतर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर लगने वाले शुल्कों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, यह गाइडलाइन एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली 'यूपीआई सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी' की सिफारिशों पर आधारित होगी. हाल ही में संसद द्वारा पारित संशोधनों और वित्त मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना के बाद उच्च मूल्य वाले मर्चेंट लेनदेन पर सीमित शुल्क लगाने की कानूनी राह साफ हो गई है. यह भी पढ़ें: UPI Payment Update: यूपीआई यूजर्स को बड़ी राहत, ₹2,000 तक के लेन-देन और RuPay कार्ड पर नहीं लगेगा कोई शुल्क
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना: 2,000 रुपये तक UPI और RuPay पूरी तरह सुरक्षित
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (51 of 2007) की धारा 10A के तहत एक नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया है:
- बैंकों पर स्पष्ट रोक: अधिसूचना के तहत कोई भी बैंक या पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर किसी भी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं वसूल सकता.
- दो माध्यम सुरक्षित:
- रूपे (RuPay) डेबिट कार्ड से किए जाने वाले सभी लेनदेन.
- 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई (UPI) भुगतान.
- अधिसूचना ने 2,000 रुपये से कम के छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त वित्तीय भार से कानूनी सुरक्षा प्रदान कर दी है.
क्या आम ग्राहकों को देना होगा चार्ज? सरकार का रुख स्पष्ट
यूपीआई शुल्क को लेकर सोशल मीडिया और आम जनता में उपजे संशय पर केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय ने अपनी स्थिति दोहराई है:
- ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता स्तर पर यूपीआई भुगतान हमेशा की तरह पूरी तरह निशुल्क रहेगा.
- एमडीआर केवल व्यापारियों के लिए: Financial Express के अनुसार, विचारणीय शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) है, जो बड़े कारोबारियों और मर्चेंट्स पर लागू होता है, न कि सामान खरीदने वाले आम ग्राहकों पर.
- पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर फ्री: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में किए जाने वाले किसी भी मूल्य के ट्रांसफर (जैसे दोस्तों या परिजनों को पैसे भेजना) पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे.
2,000 रुपये से अधिक पर क्या हो सकते हैं संभावित चार्ज?
डिजिटल भुगतान उद्योग लंबे समय से शून्य-एमडीआर (Zero MDR) व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहा था ताकि सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विकास की लागत को पूरा किया जा सके:
- संभावित दर: सूत्रों और पूर्व की रिपोर्ट्स के अनुसार, 1.5 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले बड़े व्यवसायों पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 3% से 0.5% का सांकेतिक एमडीआर लगाने पर विचार किया जा रहा है.
- छोटे व्यापारी बाहर: स्थानीय किराना दुकानों, छोटे खुदरा विक्रेताओं और रेहड़ी-पटरी वालों को इस दायरे से बाहर रखा जाएगा.
संसद द्वारा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में किए गए हालिया संशोधनों ने सरकार को यह अधिकार दिया है कि वह आवश्यकतानुसार डिजिटल अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स पर नियम तय कर सके. एनपीसीआई की आगामी विस्तृत गाइडलाइंस में यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि बड़े मर्चेंट्स के लिए यह नया शुल्क ढांचा कब से और किस रूप में प्रभावी होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 15, 2026 01:23 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

