जयपुर, 12 अगस्त राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को कहा कि युवाओं के भीतर समाज में परिवर्तन लाने की शक्ति होती है तथा उनकी ऊर्जा और नए आविष्कार की क्षमता समाज को नई दिशा दे सकती है।
वह यहां कृषि अनुसंधान केन्द्र में आयोजित राज्य स्तरीय युवा महापंचायत ‘युवा संकल्प’ को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि युवा होना एक अद्भुत और महत्वपूर्ण दौर होता है, युवा शब्द सिर्फ एक आयु का ही नहीं बल्कि यह ऊर्जावान होने का भी संकेत है। उन्होंने कहा कि नवीन युवा नीति से राजस्थान 2030 तक देश का अग्रणी राज्य बनेगा तथा इसी दिशा में नयी 'युवा नीति' विजन 2030 को साकार करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
इस कार्यक्रम में राजस्थान की नवीन युवा नीति पर प्रस्तुतीकरण दिया गया तथा इस पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान युवा बोर्ड के अध्यक्ष सीताराम लांबा ने मुख्यमंत्री को नवीन युवा नीति का मसौदा सौंपा। मुख्यमंत्री ने ‘युवाओं की आकांक्षाएं’ पुस्तिका का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में युवाओं के हित में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं तथा राज्य सरकार युवाओं के कल्याण, उनके रोजगार और कौशल विकास, उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उनका कहना था कि युवाओं के सुनहरे भविष्य के लिए प्रदेश का बजट युवाओं को समर्पित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई युवा नीति शीघ्र ही जारी की जाएगी और राज्य में 500 करोड़ रूपये का युवा विकास और कल्याण कोष बनाने का निर्णय लिया गया है।
गहलोत ने कहा कि राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था के लिए निरंतर नवीन फैसले लिए जा रहे हैं तथा निर्धारित समय से अधिक वक्त तक खुलने वाले बार एवं नाइट क्लबों के विरूद्ध अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अनिवार्य प्राथमिकी (एफआईआर) की नीति से जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनिवार्य एफ.आई.आर. की नीति को पूरे देश में लागू करने का आग्रह किया।
गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार पेपर लीक के प्रकरणों को लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों से संवाद स्थापित कर उनमें सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने उनपर करियर को लेकर किसी भी प्रकार का मानसिक दबाव न बनाने की सलाह दी। उन्होंने अभिभावकों को जरूरत पड़ने पर अपने बच्चों के लिए परामर्श सेवा का सहारा भी लेने का भी सुझाव दिया।
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