देश की खबरें | पहलवानों का प्रदर्शन: सेंगोल पहले ही दिन झुक गया - स्टालिन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी पहलवानों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिये जाने पर रविवार को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इस मुद्दे को लेकर केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि नये संसद भवन में स्थापित किया गया राजदंड (सेंगोल)पहले ही दिन ‘झुक’ गया।

चेन्नई, 28 मई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी पहलवानों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिये जाने पर रविवार को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इस मुद्दे को लेकर केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि नये संसद भवन में स्थापित किया गया राजदंड (सेंगोल)पहले ही दिन ‘झुक’ गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत केंद्र सरकार पर स्टालिन के इस तंज से यह प्रतीत होता है कि वह राजदंड से जुड़े दावों पर निशाना साध रहे हैं, जिसे (सेंगोल को) शासन और न्याय का प्रतीक बताया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी में नये संसद भवन का प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किये जाने के बाद इसे लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समीप स्थापित किया गया।

स्टालिन, राष्ट्रीय राजधानी में कानून व्यवस्था का उल्लंघन करने को लेकर पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि इन पहलवानों ने अपनी महिला महापंचायत के लिए नये संसद भवन की ओर बढ़ने के प्रयास के दौरान सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया था।

शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था। बृजभूषण पर एक नाबालिग सहित कई महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न का आरोप है।

स्टालिन ने एक ट्वीट में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद के खिलाफ महिला पहलवानों द्वारा आरोप लगाये जाने के बाद महीनों गुजर गये हैं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक के प्रमुख स्टालिन ने कहा, ‘‘पुलिस द्वारा उन्हें (प्रदर्शनकारी पहलवानों को) घसीटे जाने के बाद हिरासत में लिया जाना निंदनीय है। यह दर्शाता है कि सेंगोल पहले दिन ही झुक गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह उचित है कि नये संसद भवन के उद्घाटन के दिन इस तरह के अत्याचार किये जाएं, जो (नये संसद भवन का प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन) विपक्षी दलों के बहिष्कार के बीच हुआ और जिससे राष्ट्रपति को दूर रखा गया।’’

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