घाना में बॉडी बिल्डिंग से जुड़ी धारणाओं को बदल रहीं महिलाएं

घाना में महिलाओं का एक समूह बॉडी बिल्डिंग से जुड़ी धारणाओं को बदलने में जुटा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

घाना में महिलाओं का एक समूह बॉडी बिल्डिंग से जुड़ी धारणाओं को बदलने में जुटा है. तमाम तरह के सामाजिक तानों को दरकिनार करते हुए वे अपनी मांसपेशियों को मजबूत बना रही हैं.जब वे घाना की सड़कों पर चलती हैं, तो उन्हें हट्टा-कट्टा, मांसल और मर्दानगी के लिए खतरे के तौर पर देखा जाता है. घाना की हृष्ट-पुष्ट और मजबूत मांसपेशियों वाली महिलाओं को देखकर देश के कुछ लोग खीझ जाते हैं. इसके बावजूद, ये महिलाएं धारणाओं को बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें देखकर कमजोर पुरुष और उनसे चिढ़ने वाली महिलाएं कैसा महसूस करती हैं.

घाना की पेशेवर बॉडी बिल्डर मैरी न्यारको ओमाले ने डीडब्ल्यू को बताया, "जब मेरे शरीर में बदलाव होना शुरू हुआ, तो लोगों के लिए यह बिल्कुल नया था. मैं हमेशा अपने शरीर को ढंक कर रखती थी. हालांकि, अब मैं बूटी शॉट्स पहनती हूं, स्लीवलेस पहनती हूं और घूमती हूं. मैं जानती हूं कि लोग मुझे घूरेंगे और मैं खुद को इस लायक बनाऊंगी कि वे मुझे घूरें. मैं खुद से प्यार करती हूं. मुझे पता है कि मैं कौन हूं और यह कुछ ऐसा है जो मैं जानबूझकर कर रही हूं.”बॉडी बिल्डिंग का खेल घाना में दशकों से फल-फूल रहा है, लेकिन मुख्य रूप से पुरुषों के बीच. सड़कों पर और जिम में पुरुषों को डम्बल उठाते और पुशअप करते हुए देखना आम बात है.

मिलिए भारत की हिजाब वाली बॉडीबिल्डर से

अब महिलाएं भी इस क्षेत्र में आ रही हैं तो उन्हें हतोत्साहित करने के लिए घूरा जाता है और टिप्पणियां की जाती हैं. हालांकि, उनके लिए भी बॉडी बिल्डिंग के मुकाबले में शामिल होने के मौके उपलब्ध हैं. दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होने वाला अर्नोल्ड क्लासिक इंटरनेशनल सबसे लोकप्रिय प्रतियोगिता है.

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

कई बाधाओं और सामाजिक तानों को देखते हुए घाना की कुछ महिलाओं ने इस खेल को पेशेवर रूप से आगे बढ़ाने की पहल की है. यह खेल बहादुर लोगों के लिए है. यह पार्क में टहलने जैसा नहीं है, क्योंकि इससे मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार असर पड़ता है. बॉडी बिल्डर से वेटलिफ्टर बनीं विक्टोरिया एग्बेये ने डीडब्ल्यू को बताया, "घाना में यह सामान्य धारणा है कि आप महिला होकर मांसपेशियां मजबूत क्यों बनाती हैं और मेरे लिए यह काफी संघर्षपूर्ण था. मेरे कुछ दोस्त और कुछ महिलाएं मुझसे यह कहती थीं कि मुझे मांसपेशियों को मजबूत बनाने की जगह कूल्हों को सुडौल बनाना चाहिए.”

घाना बॉडी बिल्डिंग एंड फिटनेस एसोसिएशन के पूर्व प्रमुख जज डैनियल बुडु ने कहा, "मेरे जिम में आने वाली ज्यादातर महिलाएं अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण लेती हैं.”अब बुडु घाना की राजधानी अक्रा से थोड़ी दूर स्थित तेमा शहर में जॉर्डन जिम चलाते हैं. 70 के दशक के आखिरी वर्षों में उन्होंने अपना यह जिम शुरू किया था. उनका मानना है कि उस समय के बाद से बॉडी बिल्डिंग के क्षेत्र में आने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है.

फिलहाल, डोरिस नार्टे को घाना की सबसे मजबूत महिला का खिताब मिला हुआ है. हालांकि, शुरुआत में वह इस क्षेत्र में आने की इच्छुक नहीं थीं, लेकिन उनके कोच क्वामे ने उन्हें इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया. नार्टे कहती हैं, "शुरुआत में, मुझे यह सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं थी कि मेरे कोच खेल के बारे में क्या कहते हैं, लेकिन उन्होंने जिस तरह की क्षमता मुझमें देखी उससे मैं भी प्रेरित हुई. मेरे हां कहने के बाद भी, मुझे तालमेल बिठाने में कुछ समय लगा. जब मैंने इस क्षेत्र में कदम रखा, तो मेरे ऊपर गलत टिप्पणियां की गई थीं. इस बारे में मैंने अपने कोच को बताया. उन्होंने मुझे समझाया कि बाहरी लोगों की बातों पर ध्यान मत दो और यही मेरे लिए काफी था.”

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जिंदगी की तमाम चुनौतियों को निपटने में जिम से उन्हें मदद मिलती है. अब वे नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं देती हैं. उनका सपोर्ट सिस्टम उन्हें सशक्त महसूस कराता है. वह अन्य महिलाओं को भी सकारात्मक संदेश देने की कोशिश करती हैं. इस खेल को छोड़कर दूर हो जाना कोई विकल्प नहीं है.

विक्टोरिया एग्बेये का मानना है कि सकारात्मक ऊर्जा से उनकी क्षमता बढ़ जाती है. वह कहती हैं, "मेरी मां, मेरी बेटी, मेरे शुभचिंतक और मेरे कोच मेरा समर्थन करते हैं और उनसे मुझे प्रेरणा मिलती है. आम तौर पर, मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि जब मेरा शरीर थक जाए, तो वे मुझे मानसिक शक्ति दें.”

फंडिंग एक बड़ी चुनौती

एक पेशे के तौर पर, किसी मुकाबले में शामिल होने के लिए काफी धन की जरूरत होती है. अधिकांश महिला बॉडी बिल्डर अपने सपनों को पूरा करने के लिए अलग-अलग नौकरियां करती हैं, मुख्य रूप से फिटनेस प्रशिक्षक के तौर पर. कभी-कभी वे साल में एक बार प्रतियोगिताओं में शामिल होती हैं और शुष्क मौसम में किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं लेती.

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2022 में, महिला बॉडी बिल्डरों को सहयोग करने और उन्हें एक बड़ा मंच देने के लिए मीडिया जनरल ने घाना की सबसे मजबूत महिला के खिताब के लिए प्रतियोगिता शुरू की थी. एक साल पहले ट्रायल के तौर पर इसका आयोजन किया गया था. न्यारको, नार्टे और एग्बेये सभी ने इसमें भाग लिया था. न्यारको ने इस प्रतियोगिता में जीत हासिल की. वहीं, नार्टे और एग्बेये उद्घाटन प्रतियोगिता में पहले और दूसरे स्थान पर रहीं.

नार्टे ने पुरस्कार में मिली रकम का इस्तेमाल अपने अंतिम वर्ष की स्कूल फीस और अन्य खर्चों के लिए किया. वह कहती हैं, "मैं अपने जिम का आभारी हूं. उसने मुझे आगे बढ़ने को प्रेरित किया. कभी-कभी मेरा मन रोने का करता था, लेकिन वह हमेशा मुझे प्रेरित करता था. मेरे कोच कहते थे कि मैं वही करूं जो कर सकती हूं. कुछ ऐसा न करूं जिससे मुझे चोट लगे. इसलिए, मैंने पुरस्कार की तुलना में खेल के रोमांच पर ज्यादा ध्यान दिया.”

एग्बेये एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए वोल्टा क्षेत्र से अक्रा चली गई हैं. पुरस्कार के तौर पर उन्हें जो रकम मिली वह अच्छी शुरुआत थी, लेकिन पर्याप्त नहीं. न्यारको कहती हैं, "मुझे न के बराबर प्रायोजक मिले. अधिकांश खर्च मुझे खुद करने पड़ते हैं. यह आसान नहीं है. मुझे अपने सपनों को पूरा करने के लिए कई सारे प्रायोजक की जरूरत है. वीजा और यात्रा से जुड़े अन्य खर्चों को पूरा करने में काफी ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.”

नार्टे को प्रशिक्षित करने वाले प्रमोटर ओडिक्रो बेरिमा ने डीडब्ल्यू को बताया कि खुद से पैसे जुटाकर बॉडी बिल्डिंग कार्यक्रम में हिस्सा लेना उनके लिए एक निवेश है. उन्होंने कहा, "अगर आप एक प्रमोटर बनने के लिए बॉडी बिल्डिंग के कारोबार में हैं, तो बड़े प्रयोजक मिलने से पहले, बेहतर स्थिति तक पहुंचने के लिए आपको अपनी जेब से पैसे खर्च करने होंगे.”

कोच की अहम भूमिका

घाना में बॉडी बिल्डर महिलाओं से बात करते समय उनकी कहानियों में एक समानता भी दिखती है. यह वह कोच हैं जिन्होंने उन्हें प्रशिक्षित करने में मदद की, उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दिया और कई मौकों पर उनकी आर्थिक मदद भी की. हालांकि, एग्बेये को प्रशिक्षित करने वाले अल्बर्ट का कहना है कि यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि कैसे इन महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए दबाव बनाया जाए. उन्होंने समझाया, "महिलाओं का रवैया काफी अलग होता है. इसलिए जब आप उन्हें कुछ करने का निर्देश देते हैं, तो वे कभी-कभी आपसे कहती हैं कि उन्हें यह पसंद नहीं है कि कोई उन्हें आदेश दे. आपको बस यह जानना है कि आप किसके साथ काम कर रहे हैं और क्या नहीं कहना है.”

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कोचिंग भी किसी को पढ़ाने जैसा ही है. कोच क्वामे ने बताया कि नार्टे के साथ काम करने से उन्हें अपने और अपने करियर के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला. उन्होंने कहा, "डोरिस मेरी पहली महिला एथलीट हैं और उन्हें प्रशिक्षित करने के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है, क्योंकि यह मेरे लिए अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण काम था.” इस पेशे में शामिल लोग अभी भी रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. अभी तो बस बाधाओं को समाप्त करने की शुरुआत हुई है. एक वक्त ऐसा भी था जब घाना की सड़कों पर ह्ष्ट-पुष्ट महिलाओं के चलने और बॉडी बिल्डिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की बात से लोग अचंभित हो जाते थे, लेकिन अब समय बदल रहा है. घाना की महिलाएं धारणाओं को तोड़कर खुद को स्थापित करने में जुट गई हैं.

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