देश की खबरें | बगैर कांग्रेस, भाजपा के खिलाफ कोई विपक्ष मजबूत नहीं हो सकता: कांग्रेस नेता तारिक अनवर

हैदराबाद, 20 जनवरी तेलंगाना के खम्मम में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) द्वारा हाल ही में आयोजित एक बैठक का जिक्र करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव तारिक अनवर ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस के बिना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ लड़ने के लिए एक मजबूत विपक्ष नहीं हो सकता है।

बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर)की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, केरल के उनके समकक्ष पिनराई विजयन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव शामिल हुए थे।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अनवर ने कहा, ‘‘खम्मम की बैठक में दो या तीन मुख्यमंत्री आए... कांग्रेस के बिना एक मजबूत विपक्ष नहीं हो सकता है। क्योंकि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है। हर राज्य में इसकी मौजूदगी है। इन परिस्थितियों में अगर कोई अलग से समूह बनाने की कोशिश करता है, तो मैं समझता हूं कि यह विपक्ष को कमजोर करता है।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विचार है कि सभी विपक्षी दल एक साथ आएं और पार्टी इसके लिए लगातार प्रयास करती रहती है।

उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ दल ऐसे भी हैं, जो विपक्ष में होने के बावजूद केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की कोशिश करते रहते हैं।

अनवर ने आरोप लगाया कि असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की ‘‘बी-टीम’’ के रूप में काम कर रही है जबकि केजरीवाल और ओवैसी का काम उत्तर भारत में धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले आठ साल से केसीआर का राजनीतिक उद्देश्य कांग्रेस पार्टी को कमजोर करना रहा है। कहा गया कि उत्तर में यह काम केजरीवाल को दिया गया और दक्षिण में केसीआर को दिया गया। उनका काम यह सुनिश्चित करना है कि विपक्षी दल कभी एकजुट ना हों।’’

एक सवाल के जवाब में कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में तीसरे मोर्चे के कई उदाहरण हैं लेकिन भाजपा विरोधी मोर्चा सिर्फ एक ही हो सकता है।

केसीआर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस पार्टी ने 2014 में मौजूदा सरकार को सत्ता सौंपी थी, तब 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष था लेकिन आज यह राज्य पांच लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गया है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस ने तेलंगाना को एक अलग राज्य बनाने के लिए बहुत बलिदान दिया, हालांकि कई लोग इस फैसले से खुश नहीं थे।

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