जरुरी जानकारी | बीड़ी के बंडल पर चेतावनी की अनिवार्यता के आदेश वापस लिए जाएं: बीएमएस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. आरएसएस से संबद्ध ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने सोमवार को सरकार से 13 अप्रैल के उस आदेश को वापस लेने के लिए कहा, जो बीड़ी के बंडलों पर सचित्र चेतावनी को अनिवार्य बनाता है।
नयी दिल्ली, आठ जून आरएसएस से संबद्ध ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने सोमवार को सरकार से 13 अप्रैल के उस आदेश को वापस लेने के लिए कहा, जो बीड़ी के बंडलों पर सचित्र चेतावनी को अनिवार्य बनाता है।
बीएमएस ने यह भी कहा कि सरकार के निरंतर प्रहार को देखते हुए बीड़ी उद्योग ने एक सितंबर, 2020 से काराोबार बंद करने का फैसला किया है।
संघ ने कहा कि सरकार लाखों श्रमिकों की आजीविका की ओर बगैर ध्यान दिये इस तरह के नियमों को लेकर आ रही है। संगठन का कहना है कि अन्य तंबाकू उत्पादों से बीड़ी को अलग करना चाहिये और उसी के अनुसार नए कानूनों को तैयार करने की आवश्यकता है।
बीएमएस ने कहा कि उनकी मांग है कि 13 अप्रैल, 2020 के वर्तमान आदेश को वापस लिया जाये जो प्रत्येक बीड़ी बंडल पर एक चित्रात्मक चेतावनी छापना अनिवार्य बनाता है।
संगठन ने एक बयान में कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा नोटिस ने सभी प्रकार के पैकेट पर चित्रात्मक चेतावनी छापने को कहना, बीड़ी उद्योग के लिए सबसे बड़ा झटका होगा जहां करीब 4.5 करोड़ से अधिक लोग बीड़ी और तेंदू पत्ता उद्योग पर निर्भर करते हैं।
इसने कहा है कि देश में ग्रामीण और छोटे उद्योगों में लोगों के रोजगार जा रहे हैं जहां विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और असंगठित क्षेत्र के कामगार, अभूतपूर्व महामारी के कारण संकट से भी घिरे हैं। इस तरह की स्थिति में, सरकार के लिए सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (सीओटीपीए) में संशोधन करने का यह सबसे गलत समय है।’’
बीएमएस ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य मंत्रालय बहड़ी उद्योग पर निर्भर लाखों लोगों के बुनियादी आजीविका पर विचार किए बगैर ऐसे सभी अधपके नियमों को ला रहा है। इसलिए बीएमएस दृढ़ता से मांग करता है कि सरकार को अन्य तंबाकू उत्पादों से बीड़ी को अलग करना चाहिए और उसके अनुसार नई नीतियां बनानी चाहिए।’’
बीएमएस ने एक व्यापक नीति बनाने और एक अंतर-मंत्रालय समिति बनाने की मांग की जिसमें श्रम, स्वास्थ्य, कृषि, वाणिज्य, वित्त, वन, आदिवासी मामलों, गृह मामलों, महिला एवं बाल कल्याण तथा कौशल विकास मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हों।
संगठन ने कहा कि इस समिति को त्रिपक्षीय परामर्श के बाद एक महीने के भीतर एक कार्य योजना का सुझाव देना चाहिए।
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