प्रयागराज, 11 फरवरी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से यह बताने को कहा है कि सरकार की हाईटेक सिटी टाउनशिप नीति के तहत अधिग्रहित वेव सिटी परियोजना में शेष विकास कार्य पूरा करने के लिए गाजियाबाद जिला प्रशासन द्वारा उप्पल-चड्ढा हाईटेक डेवलपर को पुलिस बल क्यों नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है।
न्यायमूर्ति एनए मुनीस और न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने उप्पल-चड्ढा हाईटेक डेवलपर (प्राइवेट) लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर मंगलवार को यह आदेश पारित किया।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से प्राप्त निर्देशों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
इन निर्देशों पर गौर करने के बाद पीठ ने कहा, “हम इन अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि याचिकाकर्ता की शिकायत दूर करने के लिए कोई ठोस एवं विश्वसनीय कारण नहीं दिया गया है।”
याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार की हाईटेक नीति के तहत अधिग्रहित जमीन पर विकास कार्य में बाधा डाल रहे शरारती तत्वों और भू माफियाओं के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग के साथ अदालत का रुख किया था।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, कंपनी ने 16 सितंबर, 2020 और 24 नवंबर, 2020 को संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करने की मांग की थी, लेकिन आज की तिथि तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इससे पूर्व, 13 जनवरी को उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को वेव सिटी परियोजना की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए की गई कार्रवाई से अदालत को अवगत कराने को कहा था। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी तय की है।
– राजेंद्र
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