ईरान के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम बिंदु माना जाता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम बिंदु माना जाता है. ईरान कई बार इसे बंद करने की धमकी दे चुका है और अब, सैन्य अभ्यास के लिए इस रास्ते को आंशिक रूप से बंद करना शुरू भी कर दिया है.मंगलवार को ईरान ने घोषणा की कि वह फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आंशिक रूप से बंद करेगा. इसे दुनिया के तेल व्यापार के लिए एक बेहद अहम रास्ता माना जाता है.

ईरान के सरकारी टीवी ने इस कदम को "सुरक्षा उपाय” बताया और कहा कि यह उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सैन्य अभ्यास की वजह से किया जा रहा है. यह सैन्य अभ्यास एक दिन पहले ही शुरू हुआ था.

हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह आंशिक बंदी कितने समय तक चलेगी. लेकिन एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रोक कई घंटों तक जारी रह सकती है.

इससे पहले भी ईरान कई बार इस रास्ते को बंद करने की धमकी दे चुका है. वह कई बार यह दिखाने की कोशिश करता रहा है कि अगर वह चाहे, तो दुनिया के तेल की "मुख्य नली,” जिससे दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, उसे बंद कर दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी झटका दे सकता है.

यह कदम ऐसे समय में आया है, जब ईरान और अमेरिका के वार्ताकार, जिनेवा में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की बातचीत कर रहे हैं.

साथ ही, हाल के हफ्तों में अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी हद तक बढ़ाई है, ताकि ईरान पर परमाणु सपनों और सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों पर की गई हिंसक कार्रवाई को रोकने के लिए दबाव बनाया जा सके.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अभी कैसी स्थिति है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है. यह ओमान और ईरान के बीच है, जो कि फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन इसे "दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट चोकपॉइंट” यानी तेल का सबसे अहम संकरा रास्ता बताता है.

इस रास्ते का सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है और जहाजों के लिए आने-जाने का रास्ता में सिर्फ दो मील तक चौड़ा है, जिस कारण अगर यहां समुद्री ट्रैफिक या जरा सी भी गड़बड़ी होती है, तो पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन सकता है.

सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे ओपेक देशों के तेल कुओं से भारी मात्रा में निकला कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में सप्लाई किया जाता है.

वोर्टेक्स नाम की ऊर्जा और शिपिंग मार्केट रिसर्च कंपनी के मुताबिक, हर दिन करीब दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है.

कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफैड नेचुरल गैस (एलएनजी) उत्पादकों में से एक है. वह भी अपने गैस निर्यात के लिए इस रास्ते पर बहुत ज्यादा निर्भर है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने को लेकर जहाज मालिक आशंका में

पिछले साल इस्राएल और ईरान के बीच हुए टकराव ने इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा का सवाल दुनिया के सामने पेश किया. पहले भी ईरान कई बार पश्चिमी देशों के दबाव के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी दे चुका है.

हालांकि, जून 2025 में इस्राएल के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान इस इलाके में वाणिज्यिक जहाजों पर कोई बड़ा हमला नहीं किया गया था.

लेकिन फिर भी जहाज मालिक इस रास्ते से गुजरने के लिए शंका में हैं. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, कुछ जहाजों ने अपनी सुरक्षा कड़ी कर दी, जबकि कुछ ने तो यहां से गुजरने वाली अपनी यात्रा ही रद्द कर दी है.

रॉयटर्स को नौसेना सूत्रों ने बताया कि पिछले साल हुए टकराव के बाद से इस इलाके में जहाजों के नेविगेशन सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप (यानी जैमिंग) की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की सप्लाई में लंबी रुकावट या पूरी तरह नाकाबंदी हुई, तो कच्चे तेल की कीमतें अचानक से आसमान छू सकती हैं. इससे खासकर तेल आयात करने वाले एशियाई देशों को बड़ा झटका लग सकता है.

अगर रुकावट आई, तो सबसे ज्यादा असर किस पर होगा?

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कच्चे तेल और ईंधन का करीब 82 फीसदी हिस्सा एशिया जाता है.

चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया इस रास्ते से आने वाले तेल के सबसे बड़े खरीदार देश हैं. यह चारों देश मिलकर इस रास्ते से गुजरने वाले करीब 70 फीसदी कच्चे तेल और कंडेनसेट की खपत करते हैं.

इसका मतलब हुआ कि अगर सप्लाई में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इन एशियाई देशों को सबसे बड़ा झटका लग सकता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद होने का ईरान और खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ईरान सच में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देता है, तो इससे अमेरिका की सैन्य कार्रवाई भड़क सकती है. इसका मतलब हुआ कि फिर मामला सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है.

लंबे समय तक रास्ता बंद रहने से सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों के साथ ईरान के रिश्ते भी बिगड़ सकते हैं. हालांकि, हाल के वर्षों में ईरान ने इन देशों के साथ संबंध सुधारने में काफी मेहनत की है.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि खुद ईरान भी अपने तेल के निर्यात के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है. इसलिए विशेषज्ञों के मुताबिक इस रास्ते को बंद करना ईरान के लिए ही नुकसानदायक होगा.

जेपी मॉर्गन की विश्लेषकों, नताशा कनेवा, प्रतीक केडिया और ल्यूबा साविनोवा के हवाले से रॉयटर्स ने कहा, "ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक समुद्र के जरिए सामान और तेल भेजने पर निर्भर है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को काटना खासकर ईरान और उसके एकमात्र बड़े तेल खरीदार, चीन के रिश्तों पर उल्टा असर डाल सकता है.”

कौन-सा रास्ता बन सकता है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विकल्प?

सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों ने हाल के वर्षों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करने के लिए एक वैकल्पिक रास्ते बनाने की कोशिश की है.

दोनों देशों ने ऐसा ढांचा तैयार किया है, जिससे वे अपने कुछ कच्चे तेल को दूसरे मार्गों से भेज सके. जैसे, सऊदी अरब के पास ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन है, जिसकी क्षमता रोजाना 50 लाख बैरल तेल ले जाने की है. साथ ही, यूएई ने भी अपने ऑनशोर तेल क्षेत्रों को ओमान की खाड़ी में स्थित फुजैरा एक्सपोर्ट टर्मिनल से जोड़ने वाली पाइप लाइन बनाई है.

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन का अनुमान है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट आती है. ऐसी स्थिति में करीब 26 लाख बैरल तेल प्रतिदिन वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा सकता है.

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