विदेश की खबरें | 100 मनुष्यों और एक गोरिल्ला के बीच लड़ाई में कौन जीतेगा?
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. लिस्मोर (ऑस्ट्रेलिया), एक मई (द कन्वरसेशन) अगर 100 औसत मनुष्यों और एक वयस्क नर गुरिल्ला में लड़ाई होती है तो कौन विजेता होगा? इंटरनेट पर इस सवाल का जवाब जानने वाले लोगों का तांत लगा हुआ है।
लिस्मोर (ऑस्ट्रेलिया), एक मई (द कन्वरसेशन) अगर 100 औसत मनुष्यों और एक वयस्क नर गुरिल्ला में लड़ाई होती है तो कौन विजेता होगा? इंटरनेट पर इस सवाल का जवाब जानने वाले लोगों का तांत लगा हुआ है।
इस अजीबो गरीब सवाल का जवाब जानने के लिए हजारों लोग रेडिट, टिकटॉक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहे हैं। कुछ लोगों की दलील है कि इंसानों ने किसी जमाने में विशाल मैमथ का शिकार किया था, तो वे जीत जाएंगे। वहीं, कुछ का मानना है कि सिल्वरबैक गोरिल्ला 1000 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है और एक इंसान को तो बहुत आसानी से उठा कर फेंक सकता है।
मजेदार बात तो यह है कि ये एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देने की जरूरत ही नहीं है लेकिन फिर भी इंटरनेट पर हर कोई अपने विचार रख सकता है।
मजाक और अंदाजे से परे इंटरनेट पर जोर पकड़ रही यह बहस हमें मनुष्यों में आए बदलावों पर रोशनी डालने का अवसर देती है। हमारी प्रजाति की असली ताकत क्या है? हमने कौन-कौन सी कुर्बानियां दी हैं? हालांकि इंटरनेट पर छिड़ी यह बहस हमें इंसानों और गोरिल्ला की ताकत, कमजोरी और विकास के बारे में सोचने का मौका देती है।
गोरिल्ला और मनुष्य: एक पेड़ की दो शाखाएं
गोरिल्ला, मनुष्यों के सबसे करीबी जीवी संबंधियों में से एक हैं। चिंपैंजी, बोनोबो और ओरांगुटान के साथ गोरिल्ला भी ‘होमिनिडे’ परिवार का हिस्सा हैं।
चिंपैंजी का डीएनए मनुष्यों से 98.8 प्रतिशत तक मिलता है, जबकि गोरिल्ला में यह सीमा 98.4 फीसदी है।
मनुष्यों और गोरिल्ला के बीच आखिरी कड़ी करीब एक करोड़ वर्ष पहले जुड़ी हुई थी। लेकिन इसके बाद दोनों प्रजातियों ने अलग-अलग रास्ते चुन लिए।
गोरिल्ला घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने के लिए विकसित हुए जबकि इंसान खुले मैदानों और कई तरह के माहौल में रहने लगे।
फिर भी दोनों में कई समानताएं हैं, जैसे अंगूठे का इस्तेमाल, चेहरे के भाव, जटिल सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक समझ।
जंगह में बादशाहत रखने वाला गोरिल्ला
गोरिल्ला में पूरे जंगल पर काबू रखने की शक्ति होती है, जो उसकी बादशाहत कहलाती है। जहां तक बात ताकत की है तो उसमें गोरिल्ला का कोई सानी नहीं है।
एक वयस्क नर ‘सिल्वरबैक’ गोरिल्ला 160 किलो से ज्यादा वजन का होता है और एक टन तक वजन उठा सकता है।
‘सिल्वरबैक’ गोरिल्ला के ऊपरी शरीर की ताकत चौंकानी वाली होती है और इस ताकत के पीछे कहीं न कहीं नर गोरिल्ला के बीच होने वाले द्वंद हैं, जहां ताकतवर नर ही मादा के साथ जोड़ी बनाता है।
गोरिल्ला बहुत मजबूत और सहनशील होते हैं लेकिन ज्यादातर समय शांत रहते हैं।
गोरिल्ला बुद्धिमान होने के साथ-साथ अलग-अलग आवाजों, इशारे और छाती पीटकर दूर तक संवाद करने में माहिर होते हैं।
उन्होंने सांकेतिक सीखने की क्षमता को भी दर्शाया है, वह अपने मृतकों के लिए शोक मना सकते हैं और दूसरों के प्रति सहानुभूति दिखा सकते हैं, जो उनकी बुद्धिमत्ता को दर्शाता है।
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