देश की खबरें | पश्चिमी देशों को अनाज निर्यात की बाधाओं को दूर करना चाहिए : रूस के विदेश मंत्री

यह समझौता पिछले साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता में हुआ था। इस समझौते से यूक्रेन के बंदरगाहों में फंसे हुए अनाजों की खेप की आपूर्ति में मदद मिली थी। आपूर्ति से कुछ देशों में बढ़ती खाद्य कीमतों पर नियंत्रण लगा और अनाज संकट का सामना कर रहे देशों ने भी राहत की सांस ली थी।

रूसी उर्वरकों और अनाज के निर्यात को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक अलग समझौता किया गया। रूस कई बार कह चुका है कि यह समझौता रूसी कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए काम करने में विफल रहा, जिसे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण विश्व बाजारों तक पहुंचने में दिक्कत हुई है।

तुर्किये के अपने समकक्ष के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा कि रूस ने पश्चिमी देशों को आगाह करने के लिए पिछले महीने 60 दिन तक समझौते का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।

इससे पिछली बार समझौते को 120 दिन के लिए बढ़ाया गया था। लावरोव ने कहा, ‘‘120 दिन के लिए समझौते को आगे बढ़ाने के बाद, हमने कोई संकेत नहीं देखा कि उन मुद्दों को हल किया जा सकता है और उन लोगों से अपील करते हुए थक चुके हैं जो इसे निर्धारित करते हैं।’’

लावरोव ने पश्चिमी देशों के इस तर्क को खारिज कर दिया कि रूसी खाद्य और उर्वरक प्रतिबंधों के अधीन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘रूसी निर्यात के वित्तपोषण, रसद, परिवहन और बीमा से संबंधित बाधाएं बनी हुई हैं तथा यह और कठिन हो गई हैं।’’

इस वर्ष के अंत में एक और विस्तार पर सहमत होने के बजाय, रूस यह सुनिश्चित करने के लिए तुर्किये और कतर के साथ सीधे सहयोग करने का निर्णय ले सकता है कि अनाज उन देशों को मिले जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

तुर्किये के विदेश मंत्री मेव्लुट कावुसोग्लू ने कहा कि वह और लावरोव ‘‘इस बात पर सहमत हुए कि रूसी अनाज और उर्वरक के निर्यात की बाधाओं को तुरंत दूर किया जाना चाहिए।’’

लावरोव और कावुसोग्लु ने तुर्किये और सीरिया के बीच सुलह कराने के रूसी प्रयासों पर भी चर्चा की।

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