नयी दिल्ली, सात जून लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 'पंचायती राज' इकाइयों को लोकतंत्र की नींव करार देते हुए बुधवार को कहा कि गांव भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में हैं और इन्हें मजबूत बनाने से भारत समृद्ध बनेगा तथा ऐसे में स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायती राज के स्तर पर प्रश्नकाल जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए जिससे अधिक जवाबदेही आएगी।
लोकसभा अध्यक्ष ने पानीपत और करनाल की जिला परिषदों के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए आयोजित परिचय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, बिरला ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था से लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन की भावना साकार होती है।
उन्होंने कहा कि 'पंचायती राज' इकाइयां लोकतंत्र की नींव हैं और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था देश की पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढ़ आधार पर मजबूती से टिकी हुई है।
बिरला ने कहा कि स्थानीय स्वशासन से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम आदमी की भागीदारी सुनिश्चित होती है और इससे आम आदमी कानूनों, नीतियों आदि की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम होता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ गांव भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में हैं और हमारे गांवों को मजबूत और समृद्ध बनाने से भारत समृद्ध बनेगा। इसलिए स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।’’
जनप्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि पंचायती राज प्रतिनिधियों का जनता के साथ घनिष्ठ संपर्क होता है, इसलिए उन्हें व्यापक चर्चा और संवाद के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों के साथ पूरा न्याय करेंगे और जिन लोगों ने उन्हें चुना है, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।
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