देश की खबरें | सतर्क नागरिक संगठन ने सीआईसी शीर्ष पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने का आरोप लगाया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात नवम्बर नागरिक समूह ‘सतर्क नागरिक संगठन’ ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में ‘‘पारदर्शिता की कमी’’ उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है। हालांकि उन्होंने पारदर्शिता पैनल के शीर्ष पद पर नियुक्ति का स्वागत किया।

संगठन की कार्यकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे।

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मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक भारद्वाज ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिये थे कि खोज और चयन समितियों के सदस्यों के नामों, समिति की बैठकों के एजेंडे और विवरण, रिक्तियों के लिए जारी विज्ञापनों, आवेदकों के विवरण, छांटे गये उम्मीदवारों के नामों और नियुक्तियों से संबंधित पत्राचार को सार्वजनिक किया जायेगा।

सतर्क नागरिक संगठन ने बयान में कहा, ‘‘न्यायालय ने अपने अंतिम निर्देशों में यह भी कहा, “खोज समिति के लिए यह भी उपयुक्त होगा कि वह उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए मानदंड बनाए, ताकि यह सुनिश्चित हो कि ऐसा उद्देश्य और तर्कसंगत मापदंड के आधार पर किया गया है।’’

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इसमें कहा गया है कि रिक्तियों के लिए जारी विज्ञापन के अलावा, अन्य कोई भी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

बयान में कहा गया है कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित छूट मिलने संबंधी धारा का हवाला देते हुए आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना प्रदान करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि प्रक्रिया अभी चल रही है।

केन्द्र ने यशवर्धन कुमार सिन्हा को मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) के तौर पर नियुक्त किया है। इनके अलावा पत्रकार उदय माहुरकर, पूर्व श्रम सचिव हीरा लाल सामारिया और पूर्व उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सरोज पुन्हानी को सूचना आयुक्तों के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है।

समूह ने हालांकि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति का स्वागत किया है।

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