देश की खबरें | उप राष्ट्रपति ने 2047 तक ‘नये भारत’ के निर्माण का आह्वान किया
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दांडी, छह अप्रैल उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को विश्वास जताया कि देश 2047 तक ‘नये भारत’ के निर्माण के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करेगा। 2047 को देश की आजादी के 100 साल पूरे हो जाएंगे।
नायडू यहां ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से निकाली गई 25 दिवसीय दांडी यात्रा के समापन के अवसर पर बोल रहे थे। देश की आजादी के 75 साल पूरा होने के मौके पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ की शुरुआत की गई है।
इस दांडी यात्रा में 81 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमारी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने को आए हैं। यह अमृत महोत्सव हमारे स्वाधीनता संग्राम के नायकों के त्याग और तपस्या के प्रति कृतज्ञ सम्मान प्रकट करने के लिए है, उनके महान आदर्शों के प्रति खुद को समर्पित करने के लिए है, उनके सपनों के भारत का निर्माण करने के लिए है।’’
नायडू के मुताबिक, ‘‘गांधी जी के विचार में राजनीतिक गुलामी सिर्फ आर्थिक शोषण ही नहीं बल्कि पूरे समाज की सांस्कृतिक बर्बादी भी करती है। गांधी जी गुलामी के कारण हुए राष्ट्र के सांस्कृतिक, नैतिक और चारित्रिक पतन से अधिक चिंतित थे।’’
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ गांधी जी का स्वराज, गरीब का स्वराज है। वह मानते थे कि जब तक गरीब की वह सारी जरूरतें, सुविधाएं नहीं पूरी होतीं जो किसी धनी को प्राप्त हैं, तब तक स्वराज, पूर्ण स्वराज नहीं हैं।’’
उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘1947 से अब तक हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के पदचिन्हों पर चलते आए हैं। सबका साथ, सबका विकास हमारा लक्ष्य है। हमने बहुत सारी चीजें हासिल की हैं।’’
इसके साथ ही, नायडू ने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ताकत का सम्मान करती है और स्वीकार करती है तथा यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राज्यों की वजह से है, चाहे इन राज्यों में किसी राजनीति दल की सत्ता हो।
उप राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘मुझे विश्वास है कि हम ऐसी विस्तृत रूपरेखा तैयार करेंगे कि अगले 25 वर्षों में नये भारत का निर्माण हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे नेता हमें अपने सपनों का नया भारत बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।’’
गत 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दांडी यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी। इस यात्रा में 81 लोग शामिल हुए जो मंगलवार की सुबह दांडी पहुंचे।
गौरतलब है कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘नमक सत्याग्रह’ की घोषणा करते हुए 78 लोगों ने 12 मार्च 1930 से दांडी यात्रा शुरू की थी। नमक पर अंग्रेजों के दमनकारी ‘कर’ के खिलाफ यह राष्ट्रपिता का अहिंसक विरोध था जिसकी भारत की आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका रही।
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