ताजा खबरें | राज्यसभा में विभिन्न विपक्षी दलों ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव शीघ्र कराये जाने की मांग की

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव शीघ्र कराये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए विपक्षी दलों के सदस्यों ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि भले ही सरकार अनुच्छेद 370 हटने के बाद स्थिति सामान्य होने के जितने भी दावे करे, किंतु वहां आतंकवाद की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

नयी दिल्ली, नौ फरवरी जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव शीघ्र कराये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए विपक्षी दलों के सदस्यों ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि भले ही सरकार अनुच्छेद 370 हटने के बाद स्थिति सामान्य होने के जितने भी दावे करे, किंतु वहां आतंकवाद की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

उच्च सदन में जम्मू कश्मीर पंचायती राज विधेयक (संशोधन) विधेयक, संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जातियां आदेश (संशोधन) विधेयक 2024 और संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) विधेयक पर एकसाथ हुई चर्चा में विपक्षी दलों के सदस्यों ने यह बात कही। चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के राजमणि पटेल ने कहा कि आरक्षण के प्रावधान का स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ ओबीसी का कितना आरक्षण होगा, इसका स्पष्टीकरण भी होता तो अच्छा रहता।

उन्होंने कि महिलाओं एवं ओबीसी के लिए कानून बनाये जाते हैं किंतु इन दोनों वर्गों के प्रति सरकार की नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब नीयत ठीक नहीं हो तो सारे कायदे-कानून और घोषणाएं ‘बेअर्थ’ हो जाती हैं। उन्होंने एक कविता की पंक्ति पढ़ते हुए कहा--

‘‘ लहर-लहर पर कगारों की नजर टेढ़ी हो

कल के चमन पर बहारों की नजर टेढ़ी हो

कैसे पहुंचेगी पालकी पिया के देस

यदि भोली दुल्हन पर कहारों की नजर टेढ़ी हो’’

पटेल ने कहा कि अगर वास्तविकता यह होती तो अभी तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवा दिये गये होते।

कांग्रेस के सदस्य ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षित पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना एक आवश्यक मांग है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अभाव में विभिन्न योजनाओं तथा कार्यक्रम का देश के अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार पिछड़े वर्गों की दुहाई देती है किंतु उनकी जनगणना नहीं करवा रही है। उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियों की गणना नहीं करवायी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछड़े वर्गों को गुमराह कर रही है।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार सरदार वल्लभ भाई पटेल की बात करती हैं किंतु उनके विचारों को ताला लगा दिया गया है तथा सरकार को पिछड़े वर्ग के दुख-दर्द एवं शोषण से कोई लेना-देना नहीं है।

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा की कल्पना सैनी ने इन विधेयकों का स्वागत किया और कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे विकास की राह पर लायी है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में आरक्षण के प्रावधान वाले इन विधेयकों को लाकर सरकार ने ‘सबका साथ सबका विकास’ का केवल नारा ही नहीं दिया बल्कि उसे करके भी दिखा दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के अन्य पिछड़ा वर्ग को बहुत सम्मान दिया है और उन्हें विकास के पथ पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2018 में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर इस वर्ग को सशक्त बनाया है।

तृणमूल कांग्रेस के नदीमुल हक ने चर्चा में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री के 2016 के एक बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के शेष हिस्सों के लोग कश्मीर आये, वह ऐसा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किंतु उसके बाद से कश्मीर के लोगों की समस्याएं बहुत बढ़ गयी हैं और उनके सपने कुचले जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर में स्थिति सामान्य होने का भ्रम पैदा करने की कला में माहिर है। उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए कहा-

‘‘तुमने समझा ही नहीं आंख में ठहरे हुए दुख को

तुम भी हंसती हुई तस्वीर पर मर जाते हो’’

हक ने सरकार से यह प्रश्न किया कि यदि जम्मू कश्मीर में स्थिति सामान्य है तो विधायी कार्य को बलपूर्वक संपन्न करवाने के लिए वहां के प्रमुख नेताओं को 12 घंटे तक नजरबंद क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि यदि वहां स्थिति सामान्य हो गयी है तो वहां अंतिम विधानसभा चुनाव कराये हुए दस वर्ष क्यों बीत गये?

तृणमूल सदस्य ने कश्मीर वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के हवाले से कहा कि जम्मू कश्मीर को 40 हजार करोड़ रूपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कश्मीर में गैर स्थानीय लोगों को आतंकवादियों द्वारा मारे जाने की घटनाओं की ओर भी सदन का ध्यान आकृष्ट किया।

द्रमुक के आर गिरिराजन ने चर्चा में भाग लेते हुए तमिल में अपनी बात रखी और कहा कि दलितों, महिलाओं एवं ओबीसी आरक्षण को देश में सही ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार, जम्मू कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल हो गयी है किंतु सरकार को यह बताना चाहिए कि केंद्र शासित प्रदेश में कितने सुरक्षा कर्मी तैनात हैं।

उन्होंने मांग की कि सरकार को जम्मू कश्मीर में निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

चर्चा में भाग लेते हुए आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि वह अपनी पार्टी की ओर से इन तीनों विधेयकों का पुरजोर समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पिछड़े वर्गों को उनके अधिकार मिलेंगे।

उन्होंने जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग से करवाये जाने के कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने वहां से अनुच्छेद 370 हटाने का निर्णय किया और कानून लेकर आयी तो आप ने उसका समर्थन किया था।

मित्तल ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू कश्मीर में हिंसक घटनाएं कम होंगी, शिक्षा एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा पिछड़े वर्गों को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बने अच्छे माहौल के कारण सरकार ने वहां जी-20 की बैठक करवायी जिसकी पूरे सदन को सराहना करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में प्रति व्यक्ति आय एक लाख सत्तर हजार रूपये है जो देश की प्रति व्यक्ति आय एक लाख 97 हजार रूपये से कम है। वहां मुद्रास्फीति की दर देश की औसत दर से कम है।

आप सदस्य ने नये उद्योग लगाने के मामले में धीमी प्रगति पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि यहां विपुल संभावनाएं हैं जिनका लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने वहां पनबिजली परियोजनाओं में हो रहे विलंब पर भी चिंता जतायी जिसके कारण इनकी लागत बढ़ जाती है।

जारी

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