देश की खबरें | उप्र : ‘हनीट्रैप’ की आरोपी महिला अधिवक्ता पर 10 वर्ष के लिए वकालत पर रोक

प्रयागराज, 12 सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत करने वाली एक महिला अधिवक्ता के खिलाफ लगाए गए विभिन्न आरोपों की विवेचना के बाद राज्य विधिज्ञ परिषद (बार काउंसिल), उत्तर प्रदेश ने आरोपी अधिवक्ता का पंजीकरण 10 वर्षों के लिए निलंबित कर दिया है।

राज्य विधिज्ञ परिषद की अनुशासन समिति के समक्ष वादी मुशीर अहमद सिद्दीकी ने महिला अधिवक्ता रोशन जहां सिद्दीकी के खिलाफ अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत लाइसेंस निरस्त कर दंडात्मक कार्यवाही करने का प्रार्थना पत्र पेश किया था और साथ में महिला अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों की सूची दाखिल की थी।

समिति ने विवेचना में पाया कि महिला अधिवक्ता की मूल पंजीकरण पत्रावली की जांच में पाया गया कि अधिवक्ता ने स्वयं के ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमों के संबंध में कोई भी शपथपत्र राज्य विधिज्ञ परिषद को ना तो पूर्व में और ना बाद में प्रस्तुत किया।

समिति ने जांच में यह भी पाया कि महिला अधिवक्ता ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए हैं। साथ ही वादी के भाई द्वारा पैसे के लेनदेन के मामले में महिला अधिवक्ता के खिलाफ आईपीसी की प्रासंगिक धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।

आरोप है कि इस मुकदमे के बाद अधिवक्ता ने अपनी पुत्री के माध्यम से वादी और उसके भाई के खिलाफ यौन अपराधों से बाल सरंक्षण (पॉस्को), अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया जिससे उसे वादी के भाई को रुपया ना देना पड़े।

परिषद ने अपने आदेश में कहा कि महिला अधिवक्ता के खिलाफ पाए गए साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि उसने अभी तक के अपने जीवन काल में पांच व्यक्तियों से विवाह किया है और स्वयं तिहाड़ जेल में निरुद्ध रही है। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा महिला अधिवक्ता के विरुद्ध ‘हनीट्रैप’ के मामले में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना की जा रही है।

परिषद ने अपने हालिया आदेश में कहा कि महिला अधिवक्ता को संपूर्ण भारत में अगले 10 वर्षों के लिए वकालत करने पर रोक लगाई जाती है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)