नयी दिल्ली, 25 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि विश्वविद्यालयों के स्व-नियमन के लिए बनाया गया अध्यादेश किसी छात्र के शिक्षा के अधिकार और मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि यह शैक्षणिक संस्थानों पर निर्भर है कि वे उन विद्यार्थियों को जरूरी भत्ते सुनिश्चित करें जो चिकित्सा कारणों से वंचित हैं, ताकि वैसे विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए।
अदालत ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआईपीयू) से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ने वाले दो छात्रों की मेडिकल आधार पर संस्थानों की अदला-बदली संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
उच्च न्यायालय ने कहा कि छात्र गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के हकदार हैं और उनके नियंत्रण से परे बीमारियों के कारण इससे वंचित रहना ‘इस देश के भविष्य के साथ अहित’ करने के समान होगा।
अदालत ने जीजीएसआईपीयू के कुलपति को छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।
इसमें कहा गया है कि यदि कुलपति इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि दोनों याचिकाकर्ताओं की शिकायत जायज थी और उनका अनुरोध स्वीकार्य है, तो पिछले साल की अधिसूचना से प्रभावित हुए बिना इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
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