देश की खबरें | यादवपुर विवि के दो प्रोफेसर अंतरिक्ष मिशन के लिए इसरो के सॉफ्ट लैंडिंग प्रोजेक्ट में शामिल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल के यादवपुर विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसर ने यहां विद्यार्थियों के समक्ष ‘कम्प्यूटर सिमुलेशन’ के जरिए सॉफ्ट लैंडिग का निरूपण किया। दोनों प्रोफेसर इसरो द्वारा प्रायोजित एक ग्रहीय मिशन से जुड़ी सॉफ्ट-लैंडिंग परियोजना में शामिल हैं।
कोलकाता, 26 अगस्त पश्चिम बंगाल के यादवपुर विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसर ने यहां विद्यार्थियों के समक्ष ‘कम्प्यूटर सिमुलेशन’ के जरिए सॉफ्ट लैंडिग का निरूपण किया। दोनों प्रोफेसर इसरो द्वारा प्रायोजित एक ग्रहीय मिशन से जुड़ी सॉफ्ट-लैंडिंग परियोजना में शामिल हैं।
पावर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अमिताव गुप्ता और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्यूनिकेशंस विभाग के सहायक प्रोफेसर सत्यन चटर्जी चंद्रयान 3 की मुख्य टीम में शामिल नहीं थे, लेकिन वे इसरो प्रायोजित ‘रिस्पॉन्ड’ परियोजना में काम करते हैं।
‘रिस्पॉन्ड’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसे शोध तथा विकासात्मक परियाजनाओं को शुरू करने जो अंतरिक्ष के लिए प्रासंगिक हैं और जिनसे इसरो के कार्यक्रमों को मदद पहुंचाने वाले सार्थक परिणाम हासिल हो सकें,के लिए देश में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना है।
‘रिस्पॉन्ड’ का मुख्य उद्देश्य देश में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना है ताकि अंतरिक्ष के लिहाज से प्रासंगिक शोध एवं विकास (आर एंड डी) परियोजनाओं प्रोत्साहित किया जाए और ऐसे आर एंड डी से प्राप्त उपयोगी नतीजों से इसरो के कार्यक्रमों में सहयोग किया जाए।
इसरो इन संस्थानों को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं स्थापित करने में मदद करता है और अत्याधुनिक अनुसंधान विषयों पर काम करने के लिए शोधकर्ताओं को फेलोशिप भी प्रदान करता है।
प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि लैंडर की सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कराने का श्रेय इसरो को जाता है,वहीं रिस्पॉन्ड परियोजना में साझेदार यादवपुर विश्वविद्यालय जैसे संस्थान ने विभिन्न घटकों का इस्तेमाल करते हुए सुमिलेटर मॉडल से परामर्श मुहैया कराया।
गुप्ता ने कहा, ‘‘हमने डेटा के आधार पर डिजाइनिंग और सिमुलेशन किया। एक बार लैब स्केल घटकों का उपयोग करके डिजाइनिंग का हिस्सा पूरा होने के बाद हमने इसरो को इनपुट मुहैया कराए।’’
शोध में इस बात पर ध्यान दिया गया कि लैंडर कैसे चला, कैसे घूमा, गुरुत्वाकर्षण के कारण लैंडिंग के दौरान उसे अचानक तेज गति हासिल करने से कैसे रोका गया आदि।
चंद्रयान-3 की सफलता के एक दिन बाद अरबिंदो भवन में छात्रों के सामने अपने और चटर्जी के निरूपण के बारे में गुप्ता ने कहा, ‘‘हमने छात्रों को दिखाया कि चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कैसे संभव हुई।’’
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