देश की खबरें | तूतीकोरिन मामला : पलानीस्वामी को गृह मंत्रालय का कामकाज देखने से रोकने के लिए न्यायालय में याचिका

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तूतीकोरिन में हिरासत में पिता पुत्र की मौत के मामले की जांच और मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी से अलग रखने के लिये उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को एक याचिका दायर की गयी है।

नयी दिल्ली, तीन जुलाई तूतीकोरिन में हिरासत में पिता पुत्र की मौत के मामले की जांच और मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी से अलग रखने के लिये उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को एक याचिका दायर की गयी है।

लॉकडाउन के दौरान 19 जून को तूतीकोरिन पुलिस जयराज और उनके 31 वर्षीय पुत्र जे बेन्निक्स को मोबाइल के सामानों की दुकान देर तक खोलने की वजह से पूछताछ के लिये ले गयी थी और दोनों की ही हिरासत के दौरान कथित तौर पर लगी चोटों के कारण मृत्यु हो गयी थी।

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यह जनहित याचिका अधिवक्ता ए राजाराम ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने 24 जून को सार्वजनिक बयान दिया था कि बीमारी की वजह से पिता पुत्र की मृत्यु हुयी है।

याचिका में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में इस मामले की जांच और मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने तक मुख्यमंत्री को गृह मंत्रालय का कार्यभार संभालने से रोका जाये और तिरूनेलवेली के पुलिस उपाधीक्षक, सीबीसीआईडी को इस अपराध में आरोपी व्यक्तियों को बचाने के वास्ते अपने पद का दुरूपयोग करने के लिये मुख्यमंत्री की भूमिका की भी जांच करने का आदेश दिया जाये।

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हिरासत में मारे गये पिता पुत्र के परिवार के सदस्यों के बयानों का जिक्र करते हुये याचिका में कहा गया है कि सातनकुलम थाने की पुलिस ने मृतकों को बुरी तरह से शारीरिक यातनायें दीं थीं और उनकी मृत्यु का कारण हिरासत में यातना है।

याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने 24 जून को प्रेस को सार्वजनिक बयान दिया कि बीमारी की वजह से दोनों की मृत्यु हो गयी और इस तरह से उन्होंने पिता पुत्र की मृत्यु के मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को पूरी तरह नकार दिया था।

याचिका के अनुसार, मौजूदा मुख्यमंत्री के प्रशासनिक नेतृत्व में इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच संभव नहीं है क्योंकि उनके पास ही गृह मंत्रालय का प्रभार भी है । ऐसी स्थिति में अपने सरकारी पद का दुरूपयोग करके हत्या के आरोपियों को बचाने में पलानीस्वामी की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

याचिका में मुख्यमंत्री के बयान को बहुत ही अधिक गैर जिम्मेदारी वाला बताया गया है।

मद्रास उच्च न्यायालय के एक जुलाई के निर्देश के बाद ही सीबीसीआईडी के पुलिस उपाधीक्षक ने इसकी जांच शुरू की और पहली नजर में पाया कि कुछ पुलिसकर्मियों ने पिता पुत्र को यातनायें दी थीं।

हिरासत में मौत के इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में अब हत्या का मामला जोड़ा गया है और इस संबंध में थाने के एक निरीक्षक तथा सब इंसपेकटर सहित कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

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