देश की खबरें | टीआरएस के प्रस्तावों ने अगले चुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए विमर्श तैयार किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 21वें स्थापना दिवस के मौके पर बुधवार को पार्टी को 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ता बरकरार रखने के लक्ष्य से न केवल एक स्पष्ट रोडमैप दिया गया, बल्कि यह एजेंडा भी पेश किया कि वह केंद्र में भाजपा से मुकाबला करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि केंद्र के पास अगले लोकसभा चुनाव के लिए केवल दो साल बचे हैं।

हैदराबाद, 28 अप्रैल सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 21वें स्थापना दिवस के मौके पर बुधवार को पार्टी को 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ता बरकरार रखने के लक्ष्य से न केवल एक स्पष्ट रोडमैप दिया गया, बल्कि यह एजेंडा भी पेश किया कि वह केंद्र में भाजपा से मुकाबला करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि केंद्र के पास अगले लोकसभा चुनाव के लिए केवल दो साल बचे हैं।

राज्य के लिए ''पर्याप्त नहीं करने'' के आरोप के साथ केंद्र सरकार को लक्षित करते हुए प्रस्ताव पारित किया जाना इसी ओर इशारा करते हैं।

के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के नेतृत्व वाली टीआरएस ने 2014 में युवा दक्षिणी राज्य के अस्तित्व में आने के बाद से दो बार चुनाव जीते हैं। इस समय उसने तीसरे कार्यकाल पर अपनी नजरें गड़ा रखी हैं। हालांकि, भाजपा बीते कुछ दिनों में 2020 में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) के चुनावों में उत्साही प्रदर्शन करते हुए, सत्तारूढ़ टीआरएस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक बुधवार को दिन भर चले समारोह के दौरान जिन 13 प्रस्तावों पर बहस हुई और उन्हें पारित किया गया, उन्हें 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव अभियान की शुरुआत के रूप में लिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि टीआरएस ने अपने पिछले स्थापना दिवस समारोह में जहां कल्याणकारी योजनाओं और राज्य के विकास पर ध्यान केंद्रित किया था, वहीं इस साल पहली बार तेलंगाना के लिए ''पर्याप्त नहीं करने'' के लिए वह भाजपा पर सीधे तौर पर निशाना साधती नज़र आई।

विशेषज्ञों ने कहा कि ''हथकरघा वस्त्रों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को समाप्त करने और कर लगाने से परहेज करने की मांग, कृष्णा नदी जल विवाद का समाधान, राज्य में नवोदय विद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, केंद्र द्वारा मना करने के बावजूद धान खरीद का प्रस्ताव, दो प्रतिद्वंद्वियों के बीच हाल ही में उत्पन्न कट्टरता के खिलाफ लड़ने का प्रस्ताव, केंद्र सरकार में 'पिछड़ा जाति कल्याण मंत्रालय' की स्थापना का आह्वान, इन सभी प्रस्तावों से पता चलता है कि भाजपा शासित केंद्र नवगठित राज्य की चिंताओं को दूर करने में विफल रहा है।

उन्होंने कहा कि अपने प्रस्तावों में, टीआरएस का उद्देश्य मूल्य वृद्धि और दलित समुदाय की चिंताओं से संबंधित राष्ट्रीय मुद्दों से निपटने में केंद्र की कथित अक्षमता को सामने लाना है क्योंकि इसने पूरे भारत में राज्य की दलितबंधु योजना को लागू करने की मांग की है।

कुल मिलाकर, टीआरएस के 21वें स्थापना दिवस समारोह ने स्पष्ट रूप से पार्टी के आला नेताओं और केसीआर को आगामी राज्य चुनावों के लिए अभियान शुरू करने की स्थिति में ला दिया है।

यह बुधवार को केसीआर के 3,000 से अधिक पार्टी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सामने आया, जहां उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों ने 2023 के चुनावों में ''टीआरएस की बढ़त'' दिखायी है, जिसमें पार्टी के 119 में से 90 सीटें जीतने की संभावना जतायी गयी है।

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