देश की खबरें | कॉनकॉर के एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई जल्द शुरू होगी :अधिकारी

नयी दिल्ली, तीन जुलाई भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (कॉनकॉर) के एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले की सुनवाई दशक भर के लंबे विलंब के बाद जल्द ही शुरू होगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अब 2011 में दाखिल आरोपपत्र के सिलसिले में अदालत के समक्ष एक महत्वपूर्ण फोरेंसिक रिपोर्ट सौंप दी है और मुकदमा चलाने की मंजूरी दिये जाने से अवगत कराया है।

कॉनकॉर के अधिकारी प्रियव्रत मित्रा के खिलाफ मामले में देरी के लिए मुख्य रूप से अभियोजन की मंजूरी मिलने को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था लेकिन एक समीक्षा के दौरान, यह भी पता चला कि सीबीआई के एक अधिकारी ने 2012 में केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) द्वारा प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण फोरेंसिक रिपोर्ट को दबा कर रखा था।

उक्त दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ऐसा प्रतीत होता था कि मामला 10 साल के विलंब के बाद आखिरकार बंद हो गया लेकिन जब एक विशेष अदालत ने शनिवार को आगे की कार्यवाही के लिए 14 अगस्त की तारीख तय की, तो इस मामले में अब ‘‘जल्द सुनवाई’’ होने की उम्मीद जगी है।

अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने 2011 में भारत ऑयल कंपनी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक नरेश मंगलानी और सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों सहित सात लोगों के खिलाफ व्यक्तिगत लाभ के लिए आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था।

उन्होंने बताया कि मित्रा और अन्य अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन के लिए अनिवार्य मंजूरी रिपोर्ट एजेंसी ने आरोपपत्र के साथ दाखिल नहीं की थी, जिसके चलते अदालत ने 2012 में विषय को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।

आरोप है कि मित्रा ने सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश कर तेल कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए तुगलकाबाद के इनलैंड कंटेनर डिपो में रखे कंटेनर में वजन में हेराफेरी की।

कंपनी ने कथित साजिश के तहत 3.04 करोड़ रुपये के बिल जमा किए थे, जिन्हें सीबीआई द्वारा 2010 में सतर्कता विभाग के साथ संयुक्त औचक निरीक्षण के बाद रोक दिया गया था।

सीबीआई द्वारा आरोपित सरकारी अधिकारियों के मामले में, संबंधित विभाग से अभियोजन की मंजूरी एजेंसी द्वारा अनिवार्य रूप से ली जानी होती है और उससे अदालत को अवगत कराना होता है।

सीबीआई ने नौ साल के लंबे इंतजार के बाद, 26 अक्टूबर, 2021 को, मित्रा के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी के बारे में बताया और कहा कि सीमा शुल्क विभाग द्वारा अन्य आरोपियों - अधीक्षकों ओम पाल सिंह और गगन गुप्ता और निरीक्षक परमजीत सिंह के मामले में इसे अस्वीकार कर दिया गया था।

एजेंसी ने कहा कि मंजूरी देना या अस्वीकार करना सरकार का विशेषाधिकार है। उसने कहा कि तीन सीमा शुल्क अधिकारियों के खिलाफ इसे ‘‘अस्वीकार’’ कर दिया गया है और इसलिए, उनके खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ेगा।

अदालत ने इसे अत्यधिक विलंब करार देते हुए एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा था कि एक दशक से रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल की गई।

सीबीआई ने एक जांच की, जिसमें पता चला कि पूर्व जांच अधिकारी, डीएसपी सतेंद्र सिंह ने अपने उत्तराधिकारी को मामले का पूरा प्रभार नहीं सौंपा था। केंद्रीय एजेंसी ने इस बारे में पता चलने के बाद सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी।

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