देश की खबरें | फरीदाबाद में सरकारी कार्यालय में पेड़ अवैध ढ़ंग से काटे गये: एनजीटी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा है कि हरियाणा के फरीदाबाद में पशुपालन एवं डेरी उपनिदेशक के कार्यालय परिसर में कई पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया।

नयी दिल्ली, नौ फरवरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा है कि हरियाणा के फरीदाबाद में पशुपालन एवं डेरी उपनिदेशक के कार्यालय परिसर में कई पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया।

अधिकरण एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उपनिदेशक, रेंज अधिकारी और ठेकेदार के कहने पर पीपल के कुछ पेड़ों को अनधिकृत रूप से काटने का आरोप लगाया गया था।

याचिका में कहा गया है कि वैसे तो शीशम और अन्य पेड़ों को काटने की अनुमति दी गयी थी लेकिन पीपल के वृक्षों को काटने की मंजूरी नहीं दी गयी थी।

पिछले वर्ष दिसंबर में अधिकरण ने अवैध ढंग से काटे गये वृक्षों की संख्या और अवैध कटाई की सीमा, ऐसे पेड़ों के प्रकार तथा सक्षम प्राधिकारी से ली गयी अनुमति आदि विषयों की पड़ताल के लिए एक संयुक्त समिति गठित की थी।

संयुक्त समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय के प्रतिनिधि शामिल हैं।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने तीन फरवरी को अपने आदेश में कहा कि समिति ने 31 जनवरी को अपनी रिपोर्ट पेश की और उसके अनुसार केवल गूलर के आठ पेड़ों के ‘प्रतिरोपण’ की अनुमति दी गई थी, न कि उन्हें काटने की।

न्यायमूर्ति श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरूण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि समिति की रिपोर्ट के अनुसार पीपल के तीन पेड़ों को काटकर शर्तों का उल्लंघन किया गया।

पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि राज्य सरकार उचित कार्रवाई कर सकती है और प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) को अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करने पर अपेक्षित कार्रवाई करने का निर्देश दिया जा सकता है।

पीठ ने कहा,‘‘रिपोर्ट से पता चलता है कि हालांकि पांच पीपल के पेड़ों को प्रत्यारोपित करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इसका उल्लंघन करते हुए तीन पीपल के पेड़ काटे गए हैं।’’

प्रशासन की ओर से वकीलों ने समिति की रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां या प्रतिक्रिया दर्ज करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा।

इसे अनुमति देते हुए अधिकरण ने आगे की सुनवाई के लिए मामले को 28 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया।

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