देश की खबरें | परंपरा-संस्कृति बदलते वक्त, जनसांख्यिकी के अनुरूप विकसित होनी चाहिए: बंबई उच्च न्यायालय

मुंबई, छह सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने सड़कों पर उत्सव मनाने की अनुमति देने से संबंधित नीति पर पुनर्विचार करने का अधिकारियों को निर्देश देते हुए बुधवार को कहा कि परंपरा और संस्कृति बदलते वक्त तथा शहर की जनसांख्यिकी में बदलाव के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला ने इस तरह के उत्सवों के नियमन की नीतियां तैयार करने के तरीकों पर चिंता जताई।

पीठ शिवसेना (यूबीटी) के एक सदस्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दलील दी गई कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के रवींद्र राजाराम पाटिल से संबद्ध एक समूह को पुलिस ने दही हांडी उत्सव मनाने की अनुमति क्यों दी, और कल्याण के शिवाजी चौक इलाके में उसी स्थान पर आयोजन के लिए याचिकाकर्ता के समूह को मना क्यों कर दिया गया।

इस साल कृष्ण जन्माष्टमी बुधवार (छह सितंबर) को मनाया जा रहा, जबकि दही हांडी बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी।

कल्याण पुलिस ने बुधवार को अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता समूह को पास के एक वैकल्पिक मैदान में उत्सव मनाने की अनुमति दी जाएगी।

याचिकाकर्ता ने इसे स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अदालत ने सरकार को इस तरह के उत्सवों के नियमन की अपनी नीति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि इस नीति में मुंबई की सड़कों और चौराहों पर दही हांडी उत्सव मनाने वाले विभिन्न समूहों को अनुमति देने के कारण होने वाली असुविधा और यातायात अवरूद्ध होने को ध्यान में नहीं रखा गया है।’’

पीठ ने कहा कि 50 साल पहले शहर की आबादी ज्यादा नहीं थी लेकिन अब सड़कें इस तरह के कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त नहीं रह गई हैं।

न्यायमूर्ति शुक्रे ने कहा, ‘‘हमारे खुले स्थान सीमित हैं। आप (प्राधिकार) इसका नियमन करें, अन्यथा यह अव्यवस्था वाली स्थिति हो जाएगी। जब आप धर्म की अभिव्यक्ति की अनुमति दे रहे हैं, तो आपको यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह लोगों को प्रभावित नहीं करे। संतुलन बनाना होगा।’’

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