नयी दिल्ली, छह जनवरी उच्चतम न्यायालय ने असम-मेघालय के बीच सीमा विवाद के निस्तारण के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर मेघालय उच्च न्यायालय के स्थगनादेश के निष्पादन पर रोक लगा दी।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और असम एवं मेघालय की ओर से पेश वकीलों की दलीलों का संज्ञान लिया और उच्च न्यायालय के स्थगनादेश पर रोक लगा दी।
पीठ ने इन दलीलों का संज्ञान लिया कि इस एमओयू के दायरे में लाये गये कुछ क्षेत्र पुराने सीमा विवाद के कारण लाभों से वंचित रहे हैं, साथ ही इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पीठ ने विभिन्न आधार पर एमओयू के निष्पादन के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख करने वाले चार मूल याचिकाकर्ताओं को भी नोटिस जारी किये। इन्होंने जिस आधार पर एमओयू को चुनौती दी थी, उनमें संविधान के अनुच्छेद-तीन का उल्लंघन भी शामिल है।
अनुच्छेद 3 संसद को नये राज्यों के गठन और मौजूदा राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित कानून बनाने का अधिकार देता है।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई पर सहमति जताई थी। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम इस पर सुनवाई करेंगे। कृपया याचिका की तीन प्रतियां सौंपें।’’
मेघालय उच्च न्यायालय की एक एकल पीठ ने असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित एक अंतरराज्यीय सीमा समझौते के तहत जमीन पर भौतिक सीमांकन या सीमा चौकियों के निर्माण पर गत वर्ष नौ दिसंबर को अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिस कारण दोनों राज्यों ने शीर्ष अदालत का रुख किया।
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा और असम के उनके समकक्ष हिमंत बिश्व शर्मा ने दोनों राज्यों के बीच अक्सर तनाव उत्पन्न करने वाले 12 विवादित क्षेत्रों में से कम से कम छह के सीमांकन के लिए पिछले साल 29 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद 50 साल पुराना है। हालांकि, हाल के दिनों में इसे हल करने के प्रयासों में तेजी लाई गई है। दोनों राज्यों की सीमा करीब 884.9 किमी लंबी है।
असम से अलग करके 1972 में मेघालय का गठन किया गया था, लेकिन नए राज्य ने असम पुनर्गठन अधिनियम 1971 को चुनौती दी, जिसके बाद 12 सीमावर्ती स्थानों को लेकर विवाद शुरू हुआ था।
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