नयी दिल्ली, तीन मार्च दिल्ली के रोहिणी जिले में 17 वर्षीय एक लड़का परीक्षा देने से बचने के लिए अपना घर छोड़कर चला गया और 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर तमिलनाडु में एक निर्माण स्थल पर एक मजदूर के रूप में काम करने लगा तथा झुग्गी बस्ती में रहने लगा। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, लड़के के परिजनों ने बुद्ध विहार थाने में 21 फरवरी को उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) विक्रम सिंह ने बताया, ‘‘लड़का कनॉट प्लेस स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल की 11वीं कक्षा में पढ़ता था और पढ़ने में उसकी बिल्कुल रुचि नहीं थी।’’
अधिकारी ने बताया कि जांच से पता चला है कि वह अपनी वार्षिक परीक्षा नहीं देना चाहता था। 21 फरवरी को वह घर से निकला और उसने अपने पिता को संदेश भेजा कि वह घर से जा रहा है और कोई उसकी तलाश न करे।
उन्होंने बताया कि वह लड़का दिल्ली से बेंगलुरु चला गया और वहां एक निर्माण स्थल पर एक मजदूर के रूप में काम करने लगा।
अधिकारी ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद लड़के की तलाश के लिए कई टीम गठित की गईं। उन्होंने बताया कि इस मामले में अपहरण का पहलू जानने के लिए कई सूत्रों को सक्रिय किया गया।
उन्होंने बताया कि बाद में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया और तमिलनाडु के कृष्णागिरी क्षेत्र (कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा के पास) से लड़के को पकड़ा गया।
अधिकारी ने बताया कि नाबालिग ने बेंगलुरु में एक परिचित व्यक्ति से संपर्क किया था और ट्रेन से वहां पहुंचा था।
डीसीपी ने बताया, ‘‘वह तमिलनाडु और कर्नाटक सीमा के पास एक निर्माण स्थल पर मजदूर के रूप में काम करने लगा था। जब टीम ने उसे खोजा तो वह निर्माण स्थल के पास एक झुग्गी में रह रहा था।’’
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसके पिता एक चालक के तौर पर काम करते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उसे स्कूल में दाखिला मिला था।
सूत्र ने बताया, ‘‘अब तक हमें पता चला है कि लड़के को स्कूल कभी पसंद नहीं आया और उसे लगता था कि वह खुद को स्कूल के माहौल में ढाल पाने में असमर्थ है। वह पैसा कमाना और स्वतंत्र होना चाहता था। इसी कारण से वह भाग गया।’’
उन्होंने बताया कि मामले की जांच से यह भी पता चला कि उसने अपने सहपाठियों से बिटकॉइन के बारे में जाना था और उसने जल्द से जल्द पैसा कमाने के लिए बिटकॉइन में निवेश करने की भी कोशिश की थी।
सूत्र ने बताया, ‘‘सबसे पहले उसने बैंगलोर के लिए ट्रेन पकड़ी और वहां कृष्णागिरी में एक निर्माण स्थल पर काम का विज्ञापन देखा। वह दूसरी ट्रेन लेकर वहां पहुंचा और कृष्णागिरी में काम करना शुरू कर दिया...’’
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