देश की खबरें | एक साथ चुनाव कराने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत नहीं : नचियप्पन

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नयी दिल्ली, 12 जुलाई पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता ई एम एस नचियप्पन ने संसद की एक समिति को बताया है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता नहीं है और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में बदलाव कानूनी रूप से इसके कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त हो सकता है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

कांग्रेस के पूर्व सांसद नचियप्पन ने कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति की अध्यक्षता की थी, जिसने एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया था।

नचियप्पन ने ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक की समीक्षा कर रही समिति से यह भी कहा कि सरकार को अपने मौजूदा कार्यकाल में इस प्रस्ताव को लागू करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इसकी अधिसूचना अगली लोकसभा के लिए छोड़ना कानूनी रूप से संदिग्ध होगा।

वह शुक्रवार को भाजपा के पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त समिति के समक्ष पेश हुए और एक साथ चुनाव कराने संबंधी प्रस्ताव वाले संविधान संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रस्तावित कानून के प्रावधान पर आपत्ति जताने के लिए विधायी अधिदेश पर समय से संबंधित सीमाओं के सिद्धांत का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि विधेयक पारित होने के बाद ‘‘राष्ट्रपति आम चुनाव के बाद लोक सभा की पहली बैठक की तिथि पर जारी एक सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा इस अनुच्छेद के प्रावधान को लागू कर सकते हैं, और अधिसूचना की वह तिथि नियत तिथि कहलाएगी।’’

सूत्रों ने बताया कि उन्होंने कहा कि संविधान में एक साथ या अलग-अलग चुनाव कराने की बात नहीं कही गई है, इसलिए इसमें संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा के एक साथ चुनाव एक बार में नहीं कराए जा सकते, बल्कि इस प्रक्रिया को कुछ चुनावी चक्रों में पूरा किया जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि पूर्व सांसद की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति ने भी दिसंबर 2015 में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में इनमें से कुछ सिफारिशें की थीं।

भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीशों डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जे एस खेहर भी शुक्रवार को समिति के समक्ष पेश हुए थे।

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