देश की खबरें | बहुराज्य सहकारी सोसाइटी कानून में संशोधन से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान लोस में हंगामा के आसार

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नयी दिल्ली, 18 दिसंबर बहु-राज्य सहकारी समिति कानून में संशोधन करने संबंधी विधेयक को पारित कराने के लिए जब आगामी सप्ताह इस पर चर्चा होगी, तो लोकसभा में हंगामा होने के आसार हैं।

संसदीय सूत्रों ने संकेत दिया है कि शीतकालीन सत्र निर्धारित समय से पहले 23 दिसंबर को समाप्त हो सकता है। बहरहाल विपक्षी दल तवांग मुद्दे पर चर्चा के लिए फिर से जोर दे सकते हैं। वे इस मामले पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा की मांग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारतीय और चीनी सैनिकों की तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट एक स्थान पर नौ दिसंबर को झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के कुछ जवान मामूली रूप से घायल हुए थे।

संसद का सत्र आधिकारिक रूप से 29 दिसंबर को समाप्त होना है।

विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच सरकार ने सात दिसंबर को लोकसभा में ‘बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022’ पेश किया था, जिसका मकसद सहकारी क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाना और इसकी चुनाव प्रक्रिया में सुधार करना है। विपक्ष ने इसे समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजे जाने की मांग की है।

विधेयक का मकसद बहु-राज्य सहकारी समितियों में शासन को मजबूत करना, चुनावी प्रक्रिया एवं निगरानी तंत्र में सुधार और व्यापार करने की सहजता सुनिश्चित करना है।

विपक्षी सांसदों का आरोप है कि यह कदम राज्य सरकारों के अधिकारों का अतिक्रमण करेगा।

सरकार की अगले सप्ताह कुछ अप्रचलित कानूनों को खत्म करने के लिए एक विधेयक पेश करने और पारित करने की भी योजना है।

सरकार को लगता है कि अप्रचलित और पुराने कानून नागरिकों पर अनुपालन का अनावश्यक बोझ डालते हैं।

संसद ने मई, 2014 से अब तक 1,486 अप्रचलित और अनावश्यक केंद्रीय अधिनियमों को निरस्त किया है। इसके अलावा, राज्य विषय से संबंधित 76 केंद्रीय अधिनियमों को भी संबंधित राज्य विधानसभाओं द्वारा निरस्त किया गया है।

निचला सदन समुद्री जलदस्युता रोधी विधेयक पर भी विचार कर सकता है और उसे मंजूरी दे सकता है।

राज्यसभा लोकसभा द्वारा पारित विधेयकों पर अगले सप्ताह विचार कर सकती है। इनमें संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2022 शामिल हैं। इन विधेयकों में क्रमशः तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की सूची को संशोधित करने का प्रावधान है।

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