देश की खबरें | मोदी सरकार में वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में खासी गिरावट आई : अमित शाह

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भोपाल, 22 अगस्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि नरेंद्र मोदी नीत सरकार के कार्यकाल के दौरान वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) की घटनाओं में खासी गिरावट दर्ज की गई है।

शाह ने भोपाल में केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की 23वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद वामपंथी उग्रवाद की समस्या से सख्ती से निपटने के अलावा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। 2009 में, जब वामपंथी उग्रवाद अपने चरम पर था, उस समय उग्रवादी हिंसक घटनाओं की संख्या 2,258 थी, जो 2021 में घटकर 509 रह गई।’’

एक आधिकारिक बयान में शाह के हवाले से कहा गया है कि 2009 में चरमपंथी हिंसा में कुल 1,005 लोग मारे गए जबकि 2021 में 147 लोग मारे गए। उन्होंने कहा कि थानों पर हमलों की संख्या में भी कमी आई है और 2009 में 96 ऐसी घटनाएं हुईं जो 2021 में घटकर 46 रह गईं।

शाह ने कहा कि केंद्र वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को और मजबूत बना रहा है और पिछले तीन वर्षों में 40 नए सुरक्षा शिविर खोले गए हैं तथा 15 और ऐेसे केंद्र खोले जाने हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बड़ी उपलब्धि है। केंद्र, राज्यों के साथ मिलकर वामपंथी उग्रवाद की समस्या को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ये राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति, सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में योगदान और राष्ट्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

शाह सहकारिता मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत बनाने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने पिछले आठ सालों में 'टीम इंडिया' की अवधारणा को देश के सामने रखा है।"

शाह ने कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें काफी बढ़ गई हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में डाक बैंकिंग केंद्रों के साथ लगभग 5,000 डाकघर खोले हैं और वहां बैंक की 1,200 शाखाएं स्थापित की हैं।

उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस बैठक में डिजिटल तरीके से शामिल हुये क्योंकि उनके विमान भारी बारिश के कारण भोपाल हवाई अड्डे पर नहीं उतर सके।

स्थापित प्रक्रिया और प्रथा के अनुसार, क्षेत्रीय परिषद की बैठक से पहले परिषद की एक स्थायी समिति होती है जिसमें परिषद के समक्ष रखी जाने वाले मुद्दों पर गौर किया जाता है।

एक अधिकारी ने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार देश में सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए अपनी समग्र रणनीति के तहत क्षेत्रीय परिषदों की नियमित रूप से बैठकें करती रही है।

देश में पांच क्षेत्रीय परिषद हैं, जिनका गठन 1957 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 15-22 के तहत किया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं और बैठक की मेजबानी करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री इसके उपाध्यक्ष होते हैं।

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