नैनीताल, सात मार्च उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिछले साल हुए बनभूलपुरा दंगों के संबंध में विभिन्न आरोपियों द्वारा दायर की जा रही जमानत याचिकाओं पर शुक्रवार को सरकार से अपनी आपत्ति दाखिल करने को कहा।
उच्च न्यायालय ने ये निर्देश दंगा आरोपी अब्दुल मोईद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए जिसने सबूतों के साथ एक पूरक हलफनामा दायर करते हुए दावा किया था कि दंगों के दौरान वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार से मोईद की जमानत याचिका और अन्य आरोपियों द्वारा दायर इसी तरह की याचिकाओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने को कहा।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में आठ फरवरी 2024 को हुए सांप्रदायिक दंगे के सिलसिले में मोईद, उसके पिता और दंगों के कथित मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक तथा अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
मलिक और मोईद को अन्य आरोपियों के साथ मुख्य आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने मलिक की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और उससे जिला अदालत में जमानत याचिका दायर करने को कहा था।
अदालत अब इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगी।
अदालत ने एक अन्य आरोपी अब्दुल चौधरी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि घटना के समय मौके पर मौजूद सभी आरोपियों के आरोपपत्र तैयार कर उन्हें उसके सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए ।
आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें मामले में अनावश्यक रूप से फंसाया जा रहा है ।
उन्होंने कहा कि चूंकि मामले की जांच अब भी जारी है, उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए ।
बनभूलपुरा में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित मदरसे और नमाज पढ़ने के स्थान के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान दंगे भड़के थे। इस दौरान दंगाइयों ने एक पुलिस थाने और उसके बाहर खड़े वाहनों को आग लगा दी थी।
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