दक्षिण एशिया में फैलता डेंगू का साया

बांग्लादेश और नेपाल समेत दक्षिण पूरे दक्षिण एशिया में डेंगू का संक्रमण मुश्किलें पैदा कर रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बांग्लादेश और नेपाल समेत दक्षिण पूरे दक्षिण एशिया में डेंगू का संक्रमण मुश्किलें पैदा कर रहा है. खासकर इन दोनों देशों में इन्फेक्शन रोकने के प्रयास ज्यादा असरदार साबित नहीं हो रहे हैं.मच्छरों से फैलने वाला यह संक्रमण इस साल दक्षिण एशिया में भयंकर मुसीबत लेकर आया है. बांग्लादेश में रिकॉर्ड मौतें हुई हैं और नेपाल के नए इलाकों में इसके फैलने की खबर है. जानकार कहते हैं कि यह बिगड़ते हालात जलवायु परिवर्तन का सीधा असर दिखा रहे हैं. इन दोनों देशों में पैदा हालात से निपटने में प्रशासन बेबस है. कीट विज्ञानी और महामारी विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ता तापमान और मॉनसून का लंबा सीजन मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श स्थितियां पैदा कर रहे हैं.

साल 2023 में अब तक, अकेले बांग्लादेश में ही 691 मौतें हो चुकी हैं. आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि संक्रमण का शिकार लोगों की संख्या 1,38,000 से ज्यादा है. साल 2000 में इस बीमारी का पहली बार पता चलने के बाद से, संक्रमण के लिहाज से यह अब तक का सबसे बुरा साल रहा है. पिछले साल मरने वालों की संख्या 281 थी.

डेंगू का बढ़ता खतरा

यह हाल सिर्फ दक्षिण एशिया का नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, पूरी दुनिया में डेंगू के मामले बहुत ज्यादा बढ़े हैं. 2022 में दुनिया में संक्रमण के 42 लाख केस दर्ज हुए जो कि साल 2000 के मुकाबले आठ गुना ज्यादा है. डब्ल्यूएचओ ने कुछ वक्त पहले ही कहा था कि डेंगू जिस तरह से फैलता जा रहा है, उसमें महामारी का खतरा दिखता है.

ढाका की जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर कबीरुल बशर मानते हैं कि संक्रमण की रोकथामके पर्याप्त उपाय ना होने की वजह से एडीज मच्छर से फैलने वाली यह बीमारी पूरे बांग्लादेश को अपनी चपेट में ले चुकी है. इसके चलते सितंबर में इस संक्रमण के और बढ़ने के आसार नजर आते हैं. जून से सितंबर महीने का दौर आमतौर पर इन मच्छरों के बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितयां लाता है जब जगह-जगह बारिश का पानी ठहरा होता है.

बशर कहते हैं, "एडीज मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए जलवायु काफी मददगार है. डेंगू सिर्फ ढाका की समस्या नहीं है, यह पूरे देश की दिक्कत है."

नेपाल का भी बुरा हाल

नेपाल में डेंगू का पहला केस 2004 में रिकॉर्ड हुआ. देश के 77 में से 75 जिलों में इस साल कम से कम 13 मौतें हो चुकी हैं और 21,200 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. राष्ट्रीय महामारी और बीमारी नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी उत्तम कोइराला कहते हैं कि यह संख्या 2022 के स्तर को छू लेगी जब देश में 88 मौतें हुईं और 54,000 केस दर्ज किए गए. इसी तरह नेपाल स्वास्थ्य शोध परिषद के वरिष्ठ शोध अधिकारी मेघनाथ धीमल बताते हैं कि हाल के बरसों में यह संक्रमण पूरे देश में बहुत तेजी से फैला है.

नेपाल के ऊंचाई वाले इलाके जहां डेंगू के मामले नहीं थे, वह भी अब इसे फैलने से रोकनेकी जद्दोजहद में लगे हैं. जैसे पहाड़ पर बसा पूर्वी शहर धरान बेहद प्रभावित है जिसके अस्पताल और एंबुलेंस सेवाएं मरीजों के बोझ से दबी हैं. 1,60,000 की आबादी वाले इस शहर में, अगस्त महीने के दौरान संक्रमण 1700 केस प्रति दिन तक पहुंच गया.

एसबी/ओएसजे (रॉयटर्स)

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