देश की खबरें | प्रधानमंत्री की ‘मंगलसूत्र’ वाली बात सच हुई, महिलाएं गहने गिरवी रखने को मजबूर: खरगे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 'गोल्ड लोन' में व्यापक बढ़ोतरी का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि बीते लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई ‘मंगलसूत्र चुराकर ले जाने’ वाली बात सच साबित हुई है कि उनके शासन में महिलाएं अपने गहने गिरवी रखने को मजबूर हैं।

नयी दिल्ली, पांच मार्च कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 'गोल्ड लोन' में व्यापक बढ़ोतरी का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि बीते लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई ‘मंगलसूत्र चुराकर ले जाने’ वाली बात सच साबित हुई है कि उनके शासन में महिलाएं अपने गहने गिरवी रखने को मजबूर हैं।

खरगे ने यह भी कहा कि 2019 से 2024 के बीच 4 करोड़ महिलाओं ने अपने सोने को गिरवी रख 4.7 लाख़ करोड़ का ऋण लिया है।

लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक चुनावी सभा में कहा था कि देश की संपत्ति को लूटने का अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझने वाली कांग्रेस की नजर अब महिलाओं के मंगलसूत्र पर है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘नरेन्द्र मोदी जी, आपने ‘‘मंगलसूत्र चुरा कर ले जाने’’ वाली बात की थी। वो अब सच हो गई। आपके ही राज ने महिलाओं को अपने सोने के गहनों को गिरवी रखने पर मजबूर कर दिया है।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘2019 से 2024 के बीच 4 करोड़ महिलाओं ने अपने सोने को गिरवी रख 4.7 लाख़ करोड़ का ऋण लिया है। 2024 में महिलाओं द्वारा कुल लोन का 38 प्रतिशत हिस्सा गोल्ड लोन का है। फरवरी 2025 में रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चला कि गोल्ड लोन में एक साल में 71.3 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई।’’

खरगे ने कहा कि पहले आपने नोटबंदी लागू कर महिलाओं का स्त्री-धन ग़ायब किया, अब महंगाई और गिरती घरेलू बचत के चलते वे अपनी सबसे क़ीमती चीज़, अपने गहने गिरवी रखने पर मजबूर हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अर्थव्यवस्था की हालत आपने (प्रधानमंत्री) इतनी बदतर कर दी है कि दोपहिया वाहन लेने वाले हमारे मध्यम वर्ग परिवार अब उसका लोन नहीं चुका पा रहें हैं। बढ़ती ऋण चूक को देखते हुए दोपहिया वाहन फाइनेंसर 2019 के बाद पहली बार लोन देने में कटौती कर रहे हैं।’’

खरगे ने दावा किया कि ‘मंदी, तंगी और जेब-बंदी’ आज अर्थव्यवस्था का सार है।

हक

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