ताजा खबरें | भारतीय कलाकृतियों की विदेशों से वापसी के लिए संसदीय समिति ने कार्यबल गठित करने का सुझाव दिया
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद की एक समिति ने धरोहर वस्तुओं को वापस लाने संबंधी भारत के अभियान को मजबूत करने के लिए राजनयिकों, कानून विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों और कला क्षेत्र के इतिहासकारों को शामिल कर धरोहर वापसी कार्यबल गठित करने का सुझाव दिया है।
नयी दिल्ली, 25 मार्च संसद की एक समिति ने धरोहर वस्तुओं को वापस लाने संबंधी भारत के अभियान को मजबूत करने के लिए राजनयिकों, कानून विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों और कला क्षेत्र के इतिहासकारों को शामिल कर धरोहर वापसी कार्यबल गठित करने का सुझाव दिया है।
मंगलवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसद की स्थायी समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को अपने बढ़ते आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव का लाभ उठाकर और अधिक देशों के साथ सांस्कृतिक संपत्ति समझौतों पर बातचीत करनी चाहिए, जैसा कि हाल ही में अमेरिका के साथ समझौता हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन समझौतों में, लूटी गई कलाकृतियों की पहचान करने, विवादों को सुलझाने और वापसी की सुविधा के लिए स्पष्ट व्यवस्था की जानी चाहिए। ब्रिटेन जैसे देशों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां कई महत्वपूर्ण भारतीय खजाने मौजूद हैं।’’
समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि इन समझौतों को व्यापक कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों से जोड़ा जा सकता है, जिससे धरोहर वस्तुओं की वापसी के मुद्दों पर सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
संस्कृति मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) पर अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा, ‘‘संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पुनरुद्धार प्रयास का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें ‘कोहिनूर’ हीरा और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान ले जाई गई हजारों कलाकृतियां शामिल हैं।’’
समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार को कलाकृतियों की वापसी के लिए भारत के अभियान को मजबूत करने के वास्ते राजनयिकों, कानूनी विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों और कला क्षेत्र के इतिहासकारों को शामिल कर विशेष धरोहर वापसी कार्यबल गठित करने पर विचार करना चाहिए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)