नयी दिल्ली, पांच जून दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में पिछले आठ वर्ष में स्कूल, अस्पताल और फ्लाईओवर निर्माण सहित विकास की गति धीमी नहीं पड़ी है लेकिन प्रदूषण का स्तर जरूर कम हो गया है।
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर त्यागराज स्टेडियम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि शहर में 2016 के मुकाबले 2022 में ‘‘पीएम 2.5 और पीएम 10’’ दोनों का स्तर ‘‘30 प्रतिशत तक कम हो गया है।’’
उन्होंने कहा कि जब भी विकास होता है तो पेड़ों को काटने, सड़क निर्माण, धूल उड़ने समेत अन्य वजहों से प्रदूषण भी होता है।
केजरीवाल ने कहा, ‘‘दिल्ली में पिछले आठ वर्ष में विकास की गति कम नहीं हुई है। स्कूलों, अस्पतालों तथा फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है लेकिन इस अवधि में प्रदूषण का स्तर जरूर कम हो गया है।’’
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 2016 में प्रदूषण का स्तर 26 दिन तक ‘बहुत खराब’ रहा जब शहर ‘‘गैस चैम्बर के समान’’ बन गया था। उन्होंने कहा कि 2022 में ऐसे दिन केवल छह थे।
उन्होंने कहा कि 2016 में प्रदूषण का स्तर 109 दिन तक ‘‘आसमान साफ रहने के साथ खराब श्रेणी’’ में था जबकि 2022 में ऐसे दिन 163 थे।
केजरीवाल ने कहा कि शहर में 2013 में वृक्ष आच्छादन प्रतिशत (कुल भूमि क्षेत्र का) 20 फीसदी था जो आज बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के नेतृत्व में वर्ष 1973 से हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और पूरी दुनिया में करोड़ों लोग इसे मनाते हैं।
केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘गत 50 साल से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है और इस अवधि में प्रत्येक शहर, गांव और मोहल्ले में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है लेकिन दिल्ली में यह कम हुआ है क्योंकि हमने शहर के दो करोड़ लोगों के साथ काम किया और प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए कई कदम उठाए।’’
उन्होंने दिल्ली की जनता से अपील की कि वे प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को ‘जन आंदोलन’ में तब्दील कर दें।
इस बीच, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने एक बयान जारी कर, केजरीवाल द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण कम करने में भूमिका निभाने के दावे को खारिज कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली की ‘ खराब’ अवस्था और राज्य परिवहन की बिगड़ती स्थिति का प्रदूषण में सबसे अधिक योगदान है।
बिधूड़ी ने दावा किया, ‘‘सरकार ने यमुना नदी को साफ करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। अगर दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है तो यह केंद्र सरकार की कोशिश का नतीजा है।’’
इससे पहले केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘हम अक्सर सुनते हैं कि प्रदूषण खासतौर पर सर्दियों में पराली जलाने से होता है, इसलिए हमने पूसा के साथ समन्वय किया और एक रसायन तैयार किया जिसका इस्तेमाल दिल्ली की सीमा में लगभग हर किसान कर रहा है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘दिल्ली में करीब पांच हजार एकड़ इलाके में कृषि होती है और सभी किसान इस तरल रसायन का इस्तेमाल करते हैं जिससे पराली जलाने की जरूरत नहीं होती। इसलिए अब पराली से दिल्ली में प्रदूषण नहीं होता।’’
केजरीवाल ने कहा कि पहले पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का अधिकतर उद्गम स्थल पंजाब होता था लेकिन गत एक साल में वहां आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने के बाद से पंजाब से पराली की वजह से होने वाले प्रदूषण में ‘30 प्रतिशत की कमी’ आई है।
उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब सरकार ने इस समस्या का समाधान करने के लिए कई कदम उठाए हैं और हमें उम्मीद है कि इस साल इसमें (प्रदूषण) और कमी आएगी। इस समस्या के पूरी तरह से खत्म होने में कुछ साल लगेंगे लेकिन पंजाब की सरकार ने हमें उम्मीद दी है कि इस साल यह काफी कम होगा।’’
पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली के पर्यावरण व वन मंत्री गोपाल राय, स्थानीय विधायक और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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