नयी दिल्ली, 10 जुलाई वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा है कि वैश्विक संकट के समय में इसका प्रभाव कम करने और देश के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत को अपने जहाज से ढुलाई के परिवेश को मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जहाजों की संख्या बहुत सीमित है, और इससे हमें लगभग 50 अरब डॉलर का व्यापार घाटा होता है।
उन्होंने स्थिति को ‘अस्थिर’ बताते हुए कहा कि यह भारत को भी ‘कमजोर’ बनाती है। उन्होंने कहा कि जिन देशों का लॉजिस्टिक्स प्रणालियों पर मजबूत नियंत्रण है, वे वैश्विक व्यवधानों के दौरान बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
अग्रवाल ने यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के निर्यात लॉजिस्टिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स परिवेश पर हमारा कम-से-कम इतना नियंत्रण कैसे हो, जो हमारे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को समर्थन देने के लिए जरूरी है, क्योंकि हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि देश का माल ढुलाई और हवाई माल ढुलाई क्षेत्र पर सीमित नियंत्रण है।
उदाहरण देते हुए अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 महामारी के समय में ढुलाई लागत कई गुना बढ़ गई और इसका असर भारत के निर्यात पर पड़ा।
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