ईटानगर, सात मार्च अरुणाचल प्रदेश के भूमि प्रबंधन मंत्री बालो राजा ने शुक्रवार को सदन को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार सैन्य प्रतिष्ठानों द्वारा कथित रूप से कब्जा की गई पवित्र भूमि की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
तवांग निर्वाचन क्षेत्र से एनपीपी विधायक नामगे सेरिंग द्वारा शुरू की गई चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावित जिलों के उपायुक्तों को इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देगी, जिसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
राजा ने कहा, “आदिवासी समुदायों की पवित्र और धार्मिक भूमि की रक्षा करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।”
चर्चा की शुरुआत करते हुए सेरिंग ने चिंता जताई कि सीमावर्ती जिले में कई पवित्र एवं धार्मिक स्थल कथित तौर पर बिना औपचारिक अधिग्रहण के सेना के कब्जे में हैं।
उन्होंने आगाह किया कि यह स्थिति भविष्य में स्थानीय लोगों और सेना के बीच तनाव का कारण बन सकती है।
सेरिंग ने दावा किया कि 1961 से सीमावर्ती क्षेत्रों में कई पवित्र भूमि सेना के कब्जे में आ गई है।
उन्होंने सरकार से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत शुरू करने का आग्रह किया और जिले में सेना के महत्वपूर्ण योगदान तथा स्थानीय-सैन्य सौहार्द को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सेरिंग ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार राज्यभर में सेना द्वारा कथित रूप से कब्जा की गई सभी पवित्र भूमि की पहचान करे और उन्हें खाली कराने के लिए कदम उठाए तथा रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए नयी भूमि आवंटित करे।
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