देश की खबरें | आंबेडकर के लेखन के प्रकाशन की निगरानी के लिए गठित समिति के सदस्यों को कम पारिश्रमिक पर खिंचाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बम्बई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को न्यायविद-समाज सुधारक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लेखन और भाषणों के प्रकाशन की निगरानी के लिए गठित एक समिति के सदस्यों को कम पारिश्रमिक भुगतान पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की।

मुंबई, चार अगस्त बम्बई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को न्यायविद-समाज सुधारक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लेखन और भाषणों के प्रकाशन की निगरानी के लिए गठित एक समिति के सदस्यों को कम पारिश्रमिक भुगतान पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की।

न्यायमूर्ति प्रसन्ना वरले और न्यायमूर्ति किशोर संत की खंडपीठ ने कहा कि समिति के गैर-सरकारी सदस्यों को प्रतिमाह 10,000 रुपये का भुगतान करने संबंधी सरकार का निर्णय ‘‘स्वागत योग्य कदम’’ नहीं है।

खबरों में कहा गया था कि महाराष्ट्र सरकार ने आंबेडकर के साहित्य को प्रकाशित करने की अपनी परियोजना को रोक दिया था, जिसके बाद पीठ ने दिसंबर 2021 में इस संबंध में स्वत: संज्ञान लिया था।

बृहस्पतिवार को सरकारी वकील पूर्णिमा कंथारिया ने पीठ को सूचित किया कि गैर सरकारी सदस्यों को हर महीने 10,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। समिति में ऐसे 10 सदस्य हैं।

इस पर, अदालत ने कहा कि यह राशि प्रतिदिन लगभग 300 रुपये होती है।

न्यायमूर्ति वरले ने कहा, ‘‘यह क्या है? राज्य विशेषज्ञों को इतनी कम राशि का भुगतान कैसे कर सकता है? कम से कम उन्हें उनकी जानकारी और स्थिति के अनुसार भुगतान करें। यह स्वागत योग्य कदम नहीं है।’’

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