देश की खबरें | राकांपा की महिला सदस्य की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत नहीं मिली
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मुंबई, 11 जनवरी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की एक महिला सदस्य की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपी एक वकील को एक स्थानीय सत्र अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।
डिंडोशी सत्र अदालत ने धनशोधन मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह (62) की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एन एल काले ने अपने आदेश में कहा कि जांच के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ और पुलिस के समक्ष आरोपी व्यक्तियों की उपस्थिति जरूरी है।
आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध हुई।
उपनगरीय चारकोप पुलिस ने सिंह और तीन अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (महिला का शील भंग करने), 509 (शील भंग करने के लिए शब्द) और 34 (सामान्य इरादे) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब वह राकांपा मुंबई की महिला जिला अध्यक्ष बनीं तो सिंह उस समय राकांपा, उत्तर मुंबई के अध्यक्ष थे। वह उन्हें "सुंदर महिलाओं को अपने कार्यालय में भेजने" के लिए कहकर परेशान किया करते थे। चूंकि शिकायतकर्ता ने इसका विरोध किया, इसलिए सिंह कथित तौर पर उसके खिलाफ विद्वेष रखने लगे।
महिला ने यह भी दावा किया कि सिंह ने उनके सामाजिक कार्यों और करियर में बाधा उत्पन्न की।
अक्टूबर 2021 में, सिंह ने कथित तौर पर एक व्हाट्सऐप ग्रुप पर शिकायतकर्ता के बारे में आपत्तिजनक संदेश भेजे थे और राकांपा की एक बैठक में उसके बारे में कथित तौर पर झूठे बयान दिए थे।
सिंह और तीन अन्य आरोपियों ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका में दावा किया कि महिला ने उनके खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है और झूठे तथा बेबुनियाद आरोप लगाए हैं।
अदालत ने, हालांकि, उनकी दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि वर्तमान मामले में अधिकांश जांच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और उपकरणों से संबंधित है क्योंकि आरोपी व्हाट्सऐप ग्रुप पर कथित संदेश भेजने के लिए अपने फोन का इस्तेमाल करते थे।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इन उपकरणों को अभी तक जब्त नहीं किया गया है। कथित अपराध को अंजाम देने के लिए आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सेल फोन जब्त करने के लिए जांच अधिकारी के पास उनकी हिरासत अत्यंत जरूरी है।’’
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