देश की खबरें | कर्नाटक विधानमंडल की संयुक्त समिति ने बीबीएमपी को सात निगमों में बांटने की सिफारिश की

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बेंगलुरु, पांच मार्च कर्नाटक विधानमंडल की संयुक्त प्रवर समिति ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) का पुनर्गठन कर इसे अधिकतम सात नगर निगमों में बांटने की सिफारिश की है।

इस समिति को ही ‘ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस विधेयक, 2024’ की समीक्षा का काम सौंपा गया है।

समिति की रिपोर्ट में समन्वय और देखरेख प्रबंधन के लिए ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण के गठन और महापौर तथा उप महापौर के लिए 30 माह के कार्यकाल का प्रावधान किया गया है।

कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद की अध्यक्षता वाली 13 सदस्यीय समिति ने बुधवार को विधानसभा में रिपोर्ट पेश की।

पिछले साल जुलाई में ‘ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस विधेयक’ को एक संयुक्त प्रवर समिति को भेजा गया था, जिसने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर को रिपोर्ट सौंपी।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक नगर निगम की आबादी 10 लाख से कम नहीं होनी चाहिए और जनसंख्या घनत्व, पांच हजार प्रति वर्ग किलोमीटर होना चाहिए।

विधानसभा में रिपोर्ट पेश करते हुए अरशद ने कहा कि बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका की स्थापना 2008 में हुई थी, तब बेंगलुरु की जनसंख्या 70-75 लाख थी, जबकि अब 2025 में यह 1.50 करोड़ तक पहुंच जाएगी और बेंगलुरु में करीब सात करोड़ वाहन हैं।

बीबीएमपी का क्षेत्रफल लगभग 786 वर्ग किलोमीटर है जिसका प्रबंधन एक आयुक्त और एक महापौर संभालते हैं जिनका कार्यकाल 11 माह का है।

अरशद ने यह भी कि कहा कि बीबीएमपी से अलग ‘बेंगलोर जलापूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड’, बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन परिवहन निगम, बेंगलोर विद्युत सप्लाई कंपनी, मेट्रो और अन्य एजेंसियां भी काम कर रही है जिनके बीच कोई समन्वय नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘बीबीएमपी में पारदर्शिता नहीं है और भ्रष्टाचार है। शक्तियों के बंटवारे की जरूरत है, अगर ऐसा नहीं होता है तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और बेहतर, पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन संभव नहीं होगा। इसलिए, हमने बीबीएमपी को विभिन्न निगमों में बांटने करने की सिफारिश की है। हमने एजेंसियों के बीच सभी स्तरों पर समन्वय के लिए महापौर के कार्यकाल के बारे में भी सिफारिश की है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक नगर निगम में एक महापौर, एक आयुक्त, एक संयुक्त आयुक्त, स्थायी समितियां और वार्ड समितियां होंगी।

ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में प्रत्येक नगर निगम के नाम में ‘बेंगलुरु’ शब्द का इस्तेमाल समान रूप से होना चाहिए, जैसे ‘बेंगलुरु दक्षिण नगर निगम’, ‘बेंगलुरु पूर्व नगर निगम’।

रिपोर्ट में कहा गया कि महापौर और उप महापौर का कार्यकाल 30 माह करना प्रस्तावित है और उनके कार्यकाल के शुरू होने के छह महीने बाद ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, जबकि नगर निगमों का कार्यकाल पांच साल का होगा।

इस बात पर गौर करते हुए कि ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण, नगर निगम और वार्ड समितियों के निकाय प्राधिकरण होंगे, रिपोर्ट में कहा गया कि इस अधिनियम को लेकर अंतिम अधिसूचना जारी होने पर बीपीएमपी और अधिसूचित अन्य स्थानीय निकाय अस्तित्व में नहीं रहेंगे।

समिति ने सरकार को इस अधिनियम के लागू होने के 120 दिनों के भीतर ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण के गठन के संबंध में अधिसूचना जारी करने की भी सिफारिश की है।

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