देश की खबरें | पूर्व न्यायाधीश ने फोन पर अपनी बातचीत की जांच के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक दिसंबर आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने उनके और निचली अदालत के एक निलंबित मजिस्ट्रेट के बीच हुई कथित बातचीत की जांच के उच्च न्यायलाय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. ईश्वरैया ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह घटना न्यायपालिका के खिलाफ ‘‘गंभीर साजिश’’ है।

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इस याचिका में उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह ‘‘अनावश्यक और गैरकानूनी’ है और न्यायमूर्ति ईश्वरैया को नोटिस दिये बगैर यह आदेश पारित किया गया है जिससे उनका ‘अनावश्यक उत्पीड़न’ हुआ है।

उच्च न्यायालय ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर वी रवीन्द्रन से इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया था।

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याचिका के अनुसार टेलीफोन पर हुई कथित बातचीत अमरावती भूमि घोटाले में भ्रष्टाचार से संबंधित है।

पूर्व न्यायाधीश ने कहा है कि उच्च न्यायालय का आदेश अदालत की इमारत और परिसर में कोविड दिशानिर्देश लागू करने से संबंधित असम्बद्ध जनहित याचिका को फिर से खोलने और इसमें हस्तक्षेप करने के लिये निलंबित जिला मुंसिफ मजिस्ट्रेट (एस रामाकृष्ण) के आवेदन के आधार पर दिया गया है।

याचिका के अनुसार उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप के लिये दायर इस आवेदन पर पूर्व न्यायाधीश को नोटिस जारी किये बगैर ही इस बातचीत की जांच का आदेश दिया है।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के 13 अगस्त के उस आदेश के खिलाफ यह विशेष अनुमति याचिका दायर की गयी है जिसमें याचिकाकर्ता और आंध्र प्रदेश के निलंबित जिला मुंसिफ मजिस्ट्रेट के बीच फोन पर निजी बातचीत की जांच के आदेश दिये गये हैं।

अपील में कहा गया है कि इस बातचीत का विवरण आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के एक पीठासीन वरिष्ठ न्यायाधीश के खिलाफ ‘गंभीर साजिश’ और इस तरह न्यायपालिका को अस्थिर करने का खुलासा करती है।

याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने फोन पर हुई इस कथित बातचीत में सिर्फ कदाचार के आरोपों के बारे में जानकारी होने का जिक्र किया था और इस बातचीत को साजिश बताना अनावश्यक है।

याचिका में कहा गया है कि रामाकृष्ण द्वारा उपलबध कराई गयी इस कथित बातचीत की लिपि सही नहीं है और यह बातचीत के विभिन्न पहलुओं के बारे में गुमराह करती है।

इसमें कहा गया है कि इस बातचीत में आंध्रप्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में अनुचित तरीके से संपत्तियों के संदिग्ध सौदों के बारे में मंत्रिमंडल की उपसमिति द्वारा की जा रही जांच का जिक्र हुआ था।

उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में आंध्रप्रदेश सरकार की अपील पर एक अन्य मामले में अमरावती में भूमि के सौदों में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज प्राथमिकी के बारे में खबरें प्रकाशित करने पर मीडिया पर लगाई गयी पाबंदी पर रोक लगा दी थी।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि उच्च न्यायालय जनवरी के अंतिम सप्ताह तक इस लंबित मामले में निर्णय नहीं करेगा जो प्रदेश की राजधानी अमरावती में स्थानांतरित करने के दौरान कथित गैरकानूनी भूमि के सौदों से संबंधित है।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच पर रोक लगाने सहित उच्च न्यायालय के अन्य निर्देशों पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया था। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर को यह आदेश पारित किया था।

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